Menu

हमारे बारे में

प्रधान कार्यालय विभाग


प्रधान कार्यालय विभाग

विभाग का चयन करें
लेखा विभाग
केन्‍द्रीय सतर्कता कक्ष
कार्पोरेट संचार विभाग
कार्पोरेट आयोजना विभाग
आर्थिक विश्लेषण और अनुसंधान विभाग (डीईएआर)
वित्तीय समावेशन और बैंकिंग प्रौद्योगिकी विभाग
सूचना प्रौद्योगिकी विभाग
परिसर, सुरक्षा और अधिप्राप्ति विभाग
पुनर्वित्‍त विभाग
भंडारण एवं विपणन विभाग
सब्सिडियरीज़ और स्ट्रेटेजिक निवेश विभाग
पर्यवेक्षण विभाग
कृषि क्षेत्र विकास विभाग
कृषि क्षेत्र नीति विभाग
वित्‍त विभाग
मानव संसाधन प्रबंध विभाग
निरीक्षण विभाग
संस्‍थागत विकास विभाग
विधि विभाग
सूक्ष्‍म ऋण नवप्रवर्तन विभाग
कृषीत्तर क्षेत्र विकास विभाग
राजभाषा प्रभाग
जोखिम प्रबंधन विभाग
सचिव विभाग
राज्‍य परियोजना विभाग
व्‍यवसाय पहल विभाग
1.  प्रारंभ
 
बदलते आर्थिक विकास और परिवेश में बैंक के लिए व्यवसाय की नई संभावनाओं को तलाशने के उद्देश्‍य से नाबार्ड ने वर्ष 2010 में रिपोजीशनिंग का कार्य शुरू किया.  रिपोजीशनिंग करने के दौरान पहचाने गए नए व्यवसाय अवसरों के ऋण उत्पादों की ओर ऋण प्रवाह को निर्देशित करने के लिए एब नए विभाग का गठन किया गय, जिसका नाम व्यवसाय पहल विभाग है. 
 
2.  विभाग के मुख्य कार्य
 
व्‍यवसाय पहल विभाग के तीन निम्‍नलिखित ऋण उत्पादों पर कार्य करता है - 
 
अ. नाबार्ड आधारभूत संरचना विकास सहायता (नीडा) 
 
निम्‍नलिखित चार चैनलों में ग्रामीण आधारभूत परियोजनाओं को निधिपोषण के लिए नीडा एक ऋण व्यवस्था है :  
  • ग्रामीण आधारभूत सुविधा विकास परियोजनाओं के लिए राज्‍य सरकार और राज्‍य सरकार के स्‍वामित्‍व वाली संस्‍थाओं को सीधे निधिपोषण. 
  • ग्रामीण क्षेत्रों में निम्‍नलिखित द्वारा तैयार की गई सार्वजनिक-निजी साझेदारी (पीपीपी) की परियोजनाओं के लिए निधिपोषण. 
  1. राज्‍य के स्‍वामित्‍व वाली संस्‍थाएं 
  2. सहकारी संस्‍थाएं 
  3. स्‍थानीय निकाय 
  4. कंपनियां
  5. स्‍वयं सहायता समूह संघ  
  6. ग़ैर-सरकारी संगठन 
  7. सामुदायिक स्‍वामित्‍व वाले संगठन 
  8. उत्‍पादक संगठन 
  9. उपर्युक्‍त संस्‍थाओं द्वारा संवर्धित विशेष प्रयोजन व्हेकिल्स (एसपीवी) 
  • कंपनी और सहकारी संस्‍थाओं जैसी पंजीकृत संस्‍थाओं द्वारा संवर्धित नान-पीपीपी ग्रामीण आधारभूत सुविधा परियोजनाओं का निधिपोषण. 
  • ग्रामीण आधारभूत सुविधा परियोजनाओं के लिए ग़ैर-बैंकिंग वित्‍त कंपनी - आधारभूत वित्‍त कंपनी और सार्वजनिक वित्‍तीय संस्थाओं/ कंपनियों का निधिपोषण.  
आ. ज़िला मध्‍यवर्ती सहकारी बैंकों (जिमस बैंकों) को सीधे पुनर्वित्‍त सहायता (डीआरए) 
 
वैद्यनाथन समिति के पुनरुत्थान पैकेज की सिफ़ारिशों को लागू करने से जि़ला मध्‍यवर्ती सहकारी बैंक (डीसीसीबी), राज्‍य सहकारी बैंकों (रास बैंकों) के अलावा दूसरे स्रोत से वित्‍तीय संसाधन जुटाने में सक्षम हो गए हैं.  
इस संबंध में नाबार्ड ने जि़ला मध्‍यवर्ती सहकारी बैंक (जिमस बैंकों) और राज्‍य सहकारी बैंकों को सीधे वित्‍तपोषण के लिए एक अल्‍पावधि बहुउद्देशीय ऋण उत्‍पाद तैयार किया है.  
 
इ. संघों को ऋण सुविधा (सीएफ़एफ़)
 
कृषि उत्‍पादों की अधिप्राप्ति और विपणन तथा उर्वरकों कीटनाशकों आदि जैसी कृषि निवेश वस्तुओं की आपूर्ति में संलग्‍न राज्‍य विपणन/ सहकारी संघों और निगमों को अल्‍पावधि ऋण प्रदान करने के उद्देश्‍य से संघों को ऋण सुविधा (सीएफ़एफ़) की शुरूआत की गई.  
 
संघों को ऋण सुविधा (सीएफ़एफ़) के अधीन कृषि और संबंधित कमोडिटी की अधिप्राप्ति, कृषि निवेश वस्‍तुओं की आपूर्ति, आपूर्ति शृंखला प्रबंधन (सप्‍लाई चेन मैनेजमेंट), मूल्‍य संवर्धन (वैल्‍यू एडीशन) आदि के लिए कार्यशील पूंजी ऋण (18 महीने से कम की अवधि के लिए)  हेतु ऋण सहायता उपलब्‍ध है.  
 
3.  विभाग की प्रमुख उपलब्धियां
 
नाबार्ड आधारभूत सुविधा विकास सहायता (नीडा) 
नाबार्ड आधारभूत सुविधा विकास सहायता (नीडा) के अधीन 31 मार्च 2016 को संचयी स्‍वीकृति `11,384.00 करोड़ और कुल संवितरण `3,690 करोड़ था. 
 
वार्षिक प्रगति निम्‍नानुसार हैः 
 
वर्ष स्वीकृति संवितरण
2010-11 42 0
2011-12 891 423
2012-13 2701 860
2013-14 1149 575
2014-15 682 610
2015-16 5919 1222
संचयी 11384 3690
 
आरंभ से अब तक नाबार्ड आधारभूत सुविधा विकास सहायता (नीडा) के अधीन निम्नलिखित विभिन्न क्षेत्रों की 41 परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है :
 
  • ऊर्जा पारेषण
  • नवीरकरणीय उर्जा
  • विद्युत वितरण पुनरुद्धार 
  • सड़कें और पुल
  • भंडारण
  • सिंचाई
  • पेय जल
  • स्वच्छता
नाबार्ड आधारभूत सुविधा विकास सहायता (नीडा) के अधीन शामिल राज्य - कर्नाटक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, छत्तीसगढ़, पंजाब, गोवा और मध्य प्रदेश हैं.
 
ज़िला मध्यवर्ती सहकारी बैंकों (जिमस बैंकों) को सीधे पुनर्वित्त सहायता (डीआरए)
ज़िला मध्यवर्ती सहकारी बैंकों को सीधे पुनर्वित्त सहायता के अधीन 31 मार्च 2016 को कुल 90 ज़िला मध्यवर्ती सहकारी बैंकों को `23,302 करोड़ की संचयी स्वीकृति और `17,164 करोड़ संवितरित किए गए हैं. 
 
वर्ष स्वीकृति संवितरण
2010-11 100 0
2011-12 1,547 938
2012-13 3,385 2,363
2013-14 4,531 3,430
2014-15 5,680 4,893
2015-16 7,959 5,540
संचयी 23,302 17,164
 
सीधे ऋण वितरण के अधीन निधिपोषण श्रेणियों में निम्नलिखित प्रमुख हैं :
 
•         `3.00 लाख से अधिक (रियायती ब्याज सीमा के ऊपर) के फसली ऋण
•         गैर कृषि क्षेत्र गतिविधियों के अधीन कार्यशील पूंजी ऋण
•         प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के माध्यम से अधिप्राप्ति परिचालन
•         चीनी भण्डार की गिरवी के समक्ष वित्तीय सहायता
 
सीधे पुनर्वित्त सहायता प्राप्त करने वाहले राज्यों में आंध्र प्रदेश, तेलंगणा, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड राज्य शामिल हैं.
संघों के लिए ऋण सुविधा (सीएफएफ)
 
सीएफएफ के आरंभ से वित्तीय वर्ष 2015-16 तक संचयी स्वीकृति `18,649.00 करोड़ दी गई और कुल `17,418.00 करोड़ संवितरित किए गए. संघों के लिए ऋण सुविधा के अधीन वर्ष-वार स्वीकृति और संवितरण निम्नानुसार है :
 
Year Sanctioned Disbursed
2012-13 3,039 2,500
2013-14 3,110 2,750
2014-15 6,265 5,155
2015-16 6,235 7,013.50
संचयी 18,649 17,418.50
 
 
संघों के लिए ऋण सुविधा लेने वाले प्रमुख राज्यों में छत्तीसगढ़, राजस्थान, ओडिशा, गुजरात, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगणा, कर्नाटक और मध्य प्रदेश शामिल हैं.
 
संपर्क :
श्री पी.वी.एस.सूर्यकुमार
मुख्य महाप्रबंधक 
2री मंजिल, 'बी' विंग
सी-24, 'जी' ब्लॉक
बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स, बांद्रा (पूर्व)
मुंबई 400 051
टेली  : (91) 022 26524693
फैक्स : (91) 022 26530067
ई-मेल : bid@nabard.org