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व्यवसाय पहल विभाग

वर्ष 2010 में, रिपोजीशनिंग कार्य के एक भाग के रूप में, बदलते आर्थिक परिवेश में बैंक के लिए व्यवसाय की नई संभावनाओं को तलाशने के उद्देश्‍य से नाबार्ड ने कदम उठाए. इसके परिणामस्वरूप, ग्रामीण विकास हेतु सहायता प्रदान करने वाले विभिन्न ग्राहकों को नई व्यावसायिक पहलों के तहत प्रत्यक्ष ऋण सहायता प्रदान करने के लिए व्यवसाय पहल विभाग (बीआईडी) नामक एक नए विभाग का गठन किया गया.
तदनुसार, व्‍यवसाय पहल विभाग वर्तमान में निम्‍नलिखित उत्पादों से संबन्धित कार्य करता है:

नाबार्ड आधारभूत संरचना विकास सहायता (नीडा)

निम्‍नलिखित तीन चैनलों में ग्रामीण आधारभूत परियोजनाओं को निधिपोषण के लिए ‘नीडा’ एक ऋण व्यवस्था है :

  • ग्रामीण आधारभूत सुविधा परियोजनाओं के लिए राज्‍य सरकार और राज्‍य सरकार के स्‍वामित्‍व वाली संस्‍थाओं को सीधे निधिपोषण.
  • ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्यक्ष रूप से अथवा राज्य सरकार की संस्थाओं, सहकारी संस्थाओं, उत्पादक संगठनों, निगमों आदि द्वारा संवर्धित विशेष प्रयोजन उपक्रमों(एसपीवी) के माध्यम से निजी-सार्वजनिक भागीदारी (पीपीपी) वाली आधारभूत संरचना परियोजनाओं का वित्तपोषण.
  • कंपनी और सहकारी संस्‍थाओं जैसी पंजीकृत संस्‍थाओं द्वारा संवर्धित गैर-पीपीपी ग्रामीण आधारभूत सुविधा परियोजनाओं का निधिपोषण.

उपलब्धियाँ:

वर्ष 2010-11 में स्थापना से 31 दिसम्बर 2023 तक, नाबार्ड आधारभूत सुविधा विकास सहायता (नीडा) के अंतर्गत स्वीकृत संचयी एवं संवितरण क्रमशः ऋण ₹71684.61 करोड़ और ₹39142.46 करोड़ था.

वर्तमान वर्ष और पिछले पाँच वर्षों के दौरान निम्नानुसार प्रभावशाली प्रगति हुई है :

(रु. करोड़ में)

वर्ष मंजूरी संवितरण
2018-19 7362.76 2500.05
2019-20 4382.30 3727.09
2020-21 22767.75 7506.08
2021-22 8125.27 7136.26
2022-23 3581.71 6329.48
2023-24 (31 दिसम्बर 2023 तक) 2253.30 2876.60

उत्पाद के आरंभ से अब तक सुविधा विकास सहायता (नीडा) के अधीन निम्नलिखित क्षेत्रों/गतिविधियाँ की 133 परियोजनाओं को नाबार्ड ने स्वीकृति प्रदान की है :

  • ऊर्जा पारेषण
  • नवीकरणीय उर्जा (पवन)
  • नवीकरणीय उर्जा (सौर ऊर्जा उत्पादन)
  • विद्युत वितरण की बहाली
  • सड़कें और पुल
  • भंडारण
  • मंडी प्रांगण का विकास
  • सिंचाई
  • पेय जल
  • स्वच्छता / नाले
  • ग्रामीण पर्यटन
  • शिक्षा
  • संचार
  • कृषि विपणन आधारभूत संरचना
  • स्वास्थ आधारभूत संरचना
  • अन्य सामाजिक अवसंरचना

31 जुलाई 2023 की स्थिति के अनुसार, बकाया वाली परियोजनाओं की संख्या 76 है.

सहकारी बैंकों को प्रत्यक्ष पुनर्वित्त सहायता (डीआरए)

वैद्यनाथन समिति के पुनरुत्थान पैकेज की सिफ़ारिशों के लागू होने से जि़ला मध्‍यवर्ती सहकारी बैंक (डीसीसीबी), भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नियमित/अनुमोदित किसी भी वित्तीय संस्था से वित्तीय संसाधन जुटा सकते हैं.

इस संबंध में नाबार्ड ने जि़ला मध्‍यवर्ती सहकारी बैंकों (जिमस बैंकों) और राज्‍य सहकारी बैंकों को, निर्दिष्ट गतिविधियों के तहत अपने ऋण कारोबार के विस्तार हेतु, प्रत्यक्ष वित्‍तपोषण के लिए एक अल्‍पावधि बहुउद्देशीय ऋण उत्‍पाद तैयार किया है.

उपलब्धियाँ:

सहकारी बैंकों को सीधे पुनर्वित्त सहायता के अंतर्गत वर्ष 2010-11 से 31 दिसम्बर 2023 तक संचयी स्वीकृति एवं संवितरण राशी क्रमशः ₹114171.05 करोड़ और and ₹98406.29 करोड़ थी.

वर्तमान वर्ष और पिछले 5 वर्षों के दौरान वर्षवार प्रगति नीचे दी गई है :

(रु. करोड़ में)

वर्ष मंजूरी संवितरण
2018-19 7799.20 6498.50
2019-20 8932.00 9199.88
2020-21 11890.00 7373.49
2021-22 18521.00 17573.67
2022-23 21434.96 18179.41
2023-24 (31 दिसम्बर 2023 तक) 10505.15 12828.51

जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंकों द्वारा प्रत्यक्ष ऋण में निम्नलिखित महत्वपूर्ण गतिविधियां शामिल है:

  • ₹ 3.00 लाख से अधिक (ब्याज सहायता सीमा के ऊपर) के फसली ऋण
  • कृषीतर क्षेत्र गतिविधियों के अधीन कार्यशील पूंजी ऋण
  • प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के माध्यम से अधिप्राप्ति संबंधी कार्य
  • चीनी भण्डार की गिरवी के समक्ष वित्तपोषण
  • कटाई के बाद और विपणन गतिविधियाँ
  • उपज का भंडारण/ग्रेडिंग/पैकेजिंग

महासंघों के लिए ऋण सुविधा (सीएफ़एफ़)

कृषि उत्‍पादों की अधिप्राप्ति और विपणन तथा उर्वरकों, कीटनाशकों आदि जैसे कृषि पण्यों की आपूर्ति से जुड़े राज्‍य विपणन/ सहकारी संघों और निगमों को अल्‍पावधि ऋण प्रदान करने के उद्देश्‍य से महासंघों को ऋण सुविधा (सीएफ़एफ़) की शुरूआत की गई.

सामान्यत:, कृषि और अनुषंगी पण्यों की अधिप्राप्ति, दूध की खरीद, कृषि निविष्टियों की आपूर्ति, आपूर्ति शृंखला प्रबंधन (सप्‍लाई चेन मैनेजमेंट), मूल्‍य संवर्धन (वैल्‍यू एडीशन) आदि के लिए कार्यशील पूंजी ऋण हेतु महासंघों को ऋण सुविधा (सीएफ़एफ़) प्रदान की जाती है.

उपलब्धियाँ:

31 दिसम्बर 2023 के अनुसार सीएफएफ के अंतर्गत संचयी स्वीकृति और कुल संवितरण क्रमश ₹244371.87 करोड़ और ₹276258.12 करोड़ थे.

वर्तमान वर्ष और पिछले 5 वर्षों के दौरान वर्ष-वार प्रगति नीचे दी गई है:

(₹ in crore)

वर्ष मंजूरी संवितरण
2018-19 24435.32 29679.82
2019-20 25071.00 37206.56
2020-21 40160.00 47852.62
2021-22 36435.80 46434.31
2022-23 40606.75 31437.21
2023-24 (31 दिसम्बर 2023 तक) 31600.00 25037.50

डेयरी प्रसंस्करण और आधारभूत संरचना विकास निधि (डीआईडीएफ)

जैसा कि केंद्रीय बजट 2017-18 में घोषित किया गया था, भारत सरकार ने नाबार्ड में 5 वर्षों (2018-19 से 2022-23) की अवधि में कुल ₹ 8004.00 करोड़ को समूह निधि के साथ डेयरी प्रसंस्करण और आधारभूत संरचना विकास निधि (डीआईडीएफ) की स्थापना की. इस योजना का उद्देश्य दुग्ध प्रसंस्करण के लिए अतिरिक्त बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण और निर्माण, अधिक डेयरी उत्पादों का उत्पादन करके मूल्य संवर्धन, उत्पादकों के स्वामित्व और नियंत्रण वाले संस्थानों को संगठित तरल दूध बाजार में अपनी स्थिति को मजबूत करने में सहायता प्रदान करना और प्राथमिक उत्पादकों के लिए इष्टतम मूल्य प्राप्ति सुनिश्चित करना है| योजना को 31.03.2023 के आगे जारी रखने हेतु भारत सरकार से आगे के निर्देश प्रतीक्षित हैं|

उपलब्धियाँ:

योजना की परिचालन अवधि के दौरान, 31 दिसम्बर 2023 को ₹3015.60 करोड़ की संचयी ऋण राशि और ₹2,231.57 करोड़ के संचयी संवितरण के साथ 32 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई.

वर्तमान वर्ष और पिछले वर्षों के दौरान वर्ष-वार प्रगति नीचे दी गई है:

(रु. करोड़ में)

वर्ष मंजूरी संवितरण
2018-19 1216.81 440.00
2019-20 351.24 670.00
2020-21 1083.55 120.70
2021-22 364.00 118.66
2022-23 0.00 735.26
2023 -24 (31 दिसम्बर 2023 तक) 0.00 146.95

मात्स्यिकी और जलचरपालन आधारभूत संरचना विकास निधि (एफआईडीएफ)

केंद्रीय बजट 2018-19 में, भारत सरकार ने 5 वर्षों (वित्त वर्ष 2018-19 से वित्त वर्ष 2022-23 तक) की अवधि में ₹ 7522.48 करोड़ की कुल समूह निधि के साथ मत्स्य और जलचर पालन आधारभूत संरचना विकास निधि (एफ़आईडीएफ़) की स्थापना की घोषणा की थी. सार्वजनिक आधारभूत संरचना के घटकों के निर्माण के लिए नाबार्ड राज्य सरकारों/केंद्र शाषित प्रदेश को ₹ 2,508 करोड़ की निधि उपलब्ध कराएगा जिसके अंतर्गत फिशरीज़ हारबर, फिश लैंडिंग सेंटर, एकीकृत शीतन श्रृंखला, आधुनिक मत्स्य बाजार, मत्स्य प्रसंस्करण इकाइयों और अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थापना की परिकल्पना की गई है. योजना को 31.03.2023 के आगे जारी रखने हेतु भारत सरकार से आगे के निर्देश प्रतीक्षित हैं|

उपलब्धियाँ:

31 दिसम्बर 2023 तक, नाबार्ड ने संचयी रूप से 82 परियोजनाओं के लिए 8 राज्य सरकारों (तमिलनाडु-64, महाराष्ट्र-5, गुजरात-4, पश्चिम बंगाल-3, आंध्र प्रदेश-3, गोवा-1, हिमाचल प्रदेश-1, केरल -1) को ₹3248.27 करोड़ का सावधि ऋण स्वीकृत किया है। इसके अलावा अब तक, 06 राज्यों अर्थात तमिलनाडु, गुजरात, पश्चिम बंगाल, गोवा, हिमाचल प्रदेश और केरल को ₹665.39 करोड़ की राशि वितरित की है।

वर्तमान वर्ष और पिछले 4 वर्षों के दौरान वर्ष-वार प्रगति नीचे दी गई है:

(रु. करोड़ में)

वर्ष मंजूरी संवितरण
2019-20 348.00 0.00
2020-21 0.00 193.77
2021-22 912.28 171.93
2022-23 1987.99 225.67
2023-24 (31 दिसम्बर 2023 तक) 0.00 74.02

राज्य सरकारों को आधारभूत संरचना सहायता (आरआईएएस)

पूर्वी क्षेत्र की राज्य सरकारों को ग्रामीणों की आजीविका में सहायक हो ऐसी अवसंरचना के निर्माण के लिए जन, जल, जमीन, जानवर और जंगल इन ‘5-ज’ दृष्टिकोण पर आधारित वित्तीय सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से, नाबार्ड ने ₹ 15000 करोड़ की प्रारंभिक धनराशि के साथ एक नया उत्पाद ‘राज्य सरकारों को ग्रामीण अवसंरचना सहायता (RIAS)’ शुरू किया है. दूसरे शब्दों में, आरआईएएस उन सभी गतिविधियों को निधि प्रदान करेगा जो “आत्मनिर्भरता” और “चक्रीय अर्थव्यवस्था” को बढ़ावा देती हो. “चक्रीय अर्थव्यवस्था” कचरे के निकाल और कीमती संसाधनों के निरंतर उपयोग को बढ़ावा देती है.

वर्तमान और पिछले वर्ष के दौरान प्रगति नीचे दी गई है:

(रु. करोड़ में)

वर्ष मंजूरी संवितरण
2022-23 1065.00 0.00
2023-24 (31 दिसम्बर 2023 तक) 0.00 0.00

संपर्क विवरण:

श्री पार्थो सहा
मुख्य महाप्रबंधक
दूसरा माला, 'ए' विंग
सी-24, 'जी' ब्लॉक
बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स, बांद्रा (पूर्व)
मुंबई - 400 051
टेली: (91) 022 68120018
ई-मेल: bid@nabard.org

आरटीआई के अंतर्गत सूचना - धारा 4(1)(बी)

नाबार्ड प्रधान कार्यालय