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1.  आरंभ 
 
बैंककारी विनियमन अधिनियम के अंतर्गत नाबार्ड को सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का   निरीक्षण करने की शक्ति दी गई है.
 
नाबार्ड राज्य सहकारी बैंकों, जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का पर्यवेक्षण करता है औए इन बैंकों का सांविधिक निरीक्षण करता है. इसके अतिरिक्त नाबार्ड राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों, शीर्ष बुनकर समितियों, विपणन संघों आदि का स्वैच्छिक निरीक्षण करता है.
 
2.  विभाग  के मुख्य कार्य 
 
(i) पर्यवेक्षित संगठनों का सांविधिक और स्वैच्छिक निरीक्षण निम्नलिखित उद्देश्यों से किया जाता है: 
  • पर्यवेक्षित संगठनों की वित्तीय सुदृढ़ता जांचने के लिए.  
  • यह सुनिश्चित करने के लिए कि पर्यवेक्षित संगठनों का व्यवसाय नियमानुसार संचालित किया जा रहा है.  
  • यह सुनिश्चित करने के लिए कि पर्यवेक्षित संगठन भारत सरकार/ भारतीय रिजर्व बैंक/ नाबार्ड द्वारा जारी नियमों और दिशानिर्देशों का पालन करते हैं.  
  • इन्हें सुदृढ़ करने के उपाय सुझाने के लिए.  
  • निरीक्षण करने के बाद भारतीय रिजर्व बैंक को अनुसंशात्मक नोट प्रेषित करने के लिए.  
(ii) पर्यवेक्षण बोर्ड के सचिवालय के रूप में  
 
3.  पर्यवेक्षण बोर्ड
 
नाबार्ड द्वारा पर्यवेक्षण बोर्ड (राज्य सहकारी बैंकों, मध्यवर्ती सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के लिए) का गठन किया गया है.
 
पर्यवेक्षण बोर्ड नाबार्ड के निदेशक बोर्ड के लिए आंतरिक समिति के रूप में कार्य करता है. पर्यवेक्षण बोर्ड के मुख्य कार्य निम्नानुसार हैं:  
 
  • पर्यवेक्षण और निरीक्षण संबंधी मामलों में दिशानिर्देश देना 
  • निरीक्षण की गुणवत्ता पर नजर रखना 
  • निरीक्षण निष्कर्षों की समीक्षा करना और उचित उपाय सुझाना 
  • पर्यवेक्षण विभाग द्वारा किए गए अनुवर्ती कार्य की समीक्षा 
  • उभरते पर्यवेक्षकीय मामलों की पहचान करना  
  • पर्यवेक्षित बैंकों की कार्य प्रणाली में सुधार के लिए आवश्यक अनुवर्ती कार्रवाई का सुझाव देना 
  • पर्यवेक्षकीय प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के लिए सुझाव देना 
  • पर्यवेक्षित बैंकों के विरुद्ध विनियामक कार्रवाई और दिशानिर्देश के लिए भारतीय रिजर्व बैंक से  अनुशंसा करना 
  • ऑफ-साइट निरीक्षण जैसे अनुपूरक उपायों के माध्यम से प्राप्त सूचनाओं की समीक्षा और इन पर अनुवर्ती कार्रवाई करना 
  • नाबार्ड के निदेशक बोर्ड द्वारा सौंपे गए अन्य कार्यों को पूरा करना 
उपर्युक्त कार्यों के अलावा, नाबार्ड द्वारा किए गए निरीक्षणों के आधार पर पर्यवेक्षण बोर्ड समय-समय पर  सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करता है. निरीक्षणों में पाई गई कमियों पर उपचारात्मक उपाय करने के लिए संबन्धित प्राधिकारियों को सूचित किया जाता है. पर्यवेक्षण बोर्ड की टिप्पणियों के आधार पर उपयुक्त विनियामक कार्रवाई के लिए नाबार्ड भारतीय रिजर्व को अपनी  अनुशंसा भेजता है. 
 
4.  पर्यवेक्षण की प्रक्रिया 
 
  • ऑन-साइट निरीक्षण:  पर्यवेक्षण विभाग समय-समय पर राज्य सहकारी बैंकों, जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण बैंकों और अन्य राज्य स्तरीय शीर्ष संस्थाओं का ऑन-साइट निरीक्षण करता है. इन निरीक्षणों में बैंकों के परिचालनात्मक पहलुओं और जोखिम प्रोफाइल पर ध्यान केन्द्रित किया जाता है. निरीक्षण के निष्कर्षों पर समय पर अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए पर्यवेक्षण विभाग अनुवर्ती कार्रवाई करता है.
  • ऑफ-साइट निगरानी:  ऑफ-साइट निगरानी (ओएसएस) को  ऑन-साइट निरीक्षण के एक अनुपूरक टूल के रूप में आरंभ किया गया है. ऑफ-साइट निगरानी का उद्देश्य पर्यवेक्षित बैंकों की कार्यप्रणाली में किसी कमी की पहचान करने के लिए महत्वपूर्ण डाटा प्राप्त करके इसका विश्लेषण करना है.  इन विश्लेषणों के आधार पर बैंक के किसी जोखिम क्षेत्र के बारे में पूर्व चेतावनी मिलती है जिस पर बैंक के लिए आगे कार्रवाई करना अपेक्षित होता है.  
  • अनुपूरक मूल्यांकन /पोर्टफोलियो अध्ययन : इस प्रकार के कार्यकलापों से नियमित ऑन-साइट निरीक्षण/ ऑफ-साइट निगरानी के काम में मदद मिलती है. इन्हें उस समय किया जाता है जब निरीक्षणों/ निगरानी से किसी संभावित समस्या के बारे में कोई संकेत मिलता है. 
  • ऋण अनुप्रवर्तन प्रबंधन : इसके अंतर्गत विशेष मामलों में सहाकारी बैंकों के सेक्टर-वार उधारकर्ताओं के एक्सपोजर का निरंतर आधार पर अनुप्रवर्तन किया जाता है.   
  • धोखाधड़ी और दुर्विनियोजन का अनुप्रवर्तन:  पर्यवेक्षण विभाग पर्यवेक्षित निकायों में धोखाधड़ी और दुर्विनियोजन/ चोरी/ डकैती के मामलों का अनुप्रवर्तन करता है. 
5.  31 मार्च 2016 की स्थिति में विभाग की प्रमुख उपलब्धियां 
 
  • नाबार्ड ने 31 मार्च 2015 की संदर्भित तिथि के अनुसार 298 बैंकों के सांविधिक निरीक्षण का काम पूरा किया. इनमें देश के 33 रास बैंक, 229 जिमस बैंक (देश के कुल 371 बैंकों में से) और 36 क्षेग्रा बैंक (कुल 56 बैंकों में से) शामिल हैं. नाबार्ड ने 11 रासकृग्रावि बैंकों के स्वैच्छिक निरीक्षण का काम भी पूरा किया. 
  • नाबार्ड की अनुशंसा के आधार पर भारतीय रिजर्व बैंक ने 5 जिमस बैंकों और एक रास बैंक को बैंकिंग लाइसेन्स जारी किया. नाबार्ड के इस महत्वपूर्ण योगदान से देश में अब लाइसेन्सीकृत बैंकों की संख्या बढ़कर 385 हो गई है. 
  • वर्ष 2015-16 में नाबार्ड ने अपने पर्यवेक्षण के अधीन सभी बैंकों के पंजीकरण के लिए भारत सरकार के साथ समन्वय किया जिसके फलस्वरूप धन शोधन निरोधक उपाय (अपने ग्राहक को जानिए) को कार्यान्वित करने में मदद मिली है.  
  • नाबार्ड ने सांविधिक लेखांकन और निरीक्षण की गुणवत्ता सुधारने के लिए कई कार्यशालाओं का आयोजन किया है.  
  • नाबार्ड ने पर्यवेक्षित बैंकों के लिए केवायसी, धन-शोधन निरोध, सीएमए, धोखाधड़ी निरोध, निवेश, आंतरिक जांच और नियंत्रण, कारपोरेट गवर्नेंस, निवेश प्रबंधन, आस्ति देयता प्रबंधन आदि विषयों पर ‘जागरूकता कार्यक्रम’ आयोजित कराए हैं. 
  • मार्च 2015 में ‘एन्श्यूर’ नामक एक नया डाटा पोर्टल शुरू किया गया है जिसके माध्यम से बैंक अपने ओएसएस रिटर्न ऑन-लाइन प्रस्तुत कर सकते हैं. ‘एन्श्यूर’ एक वेब आधारित डाटा संग्रहण और प्रबंधन प्रणाली है. इससे ऑन–साइट निरीक्षण और ऑफ-साइट सर्वेक्षण प्रणाली के समेकन से समय  पर डाटा प्राप्त करने और निरीक्षण प्रणाली की गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद मिलती है. 
संपर्क
 
श्री के वेंकटेश्वर राव 
मुख्य महाप्रबंधक 
चौथी मंजिल, 'ए'विंग 
सी -24, 'जी' ब्लॉक 
बांद्रा-कुर्ला कॉम्ल्पेक्स, बांद्रा  (पूर्व )
मुंबई 400 051
टेली : (91) 022-26539474, (91) 022-26541834
फैक्स : (91) 022-26530103 
इ–मेल: dos@nabard.org