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प्रधान कार्यालय विभाग


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कृषीत्तर क्षेत्र विकास विभाग
1.  आरंभ
 
नाबार्ड की स्थापना के समय ही उसके मिशन में कृषीतर क्षेत्र विकास को शामिल किया गया था. कृषि से होने वाली आय पर भारत की अति निर्भरता को कम करने और आजीविका के वैकल्पिक साधनों को प्रोत्साहन देने की दृष्टि से यह क्षेत्र बहुत महत्वपूर्ण है. इस क्षेत्र के विकास से कृषि क्षेत्र में बेरोजगारी / प्रच्छन्न बेरोजगारी के कारण शहरी क्षेत्रों में आजीविका के अवसरों की तलाश में छोटे और सीमांत किसानों तथा कृषि मजदूरों के बड़े पैमाने पर होने वाले पलायन को रोकने में सहायता मिलती है. 
 
नाबार्ड ने कृषीतर क्षेत्र के विकास के लिए पिछले कुछ वर्षो से कर्इ पुनर्वित्त और संवर्धनात्मक योजनाएं तैयार की हैं और आधार स्तर की आवश्यकताओं के अनुरूप अपनी योजनाओं को बृहद और परिष्कृत /तर्कसंगत बनाने के लिए सतत प्रयास किए हैं.
ऋण प्रवाह बढ़ाने, वंचितों को ऋण उपलब्ध कराने और ग्रामीण इलाकों में छोटे, कुटीर और ग्रामोद्योगों, हथकरघा, हस्तशिल्प और अन्य ग्रामीण सेवा क्षेत्र के लिए ऋण का प्रावधान करने पर बल दिया जाता रहा है.
 
ग्रामीण कृषीतर क्षेत्र के लिए बाजार विकसित करना एक ऐसा क्षेत्र है जहां नाबार्ड ने कर्इ पहले की हैं. नाबार्ड ने कृषि क्षेत्र और कृषीतर क्षेत्र के लिए अलग-अलग निधियों के निर्माण के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में नवोन्मेषों को बढ़ावा देने के लिए सक्रियता से प्रयास किए हैं 
 
कृषीतर क्षेत्र विकास विभाग के महत्वपूर्ण क्षेत्र निम्नानुसार हैं:
 
  • ग्रामीण आवास
  • ग्रामीण स्वच्छता
  • कौशल निर्माण के लिए व्यापक आयोजना
  • ग्रामीण नवोन्मेष
  • विपणन सहयोग
  • ग्रामीण स्वास्थ्यरक्षा
  • ग्रामीण यातायात
  • ग्रामीण पर्यटन
  • अन्य कृषीतर गतिविधियां
2.  विभाग के प्रमुख कार्य
 
  • ग्रामीण कृषीतर क्षेत्र के अंतर्गत आजीविका निर्माण / वृद्धि की गतिविधियों के संवर्धन के लिए शुरू से अंत तक सहायता प्रदान करना 
  • परियोजना की प्रकृति, परियोजना के अंतर्गत चलार्इ जाने वाली गतिविधियों, परियोजना में शामिल हितधारक आदि के आधार पर अनुदान, ऋण-सह-अनुदान या ऋण/ परिक्रामी निधि सहायता के रूप में वित्तीय सहायता प्रदान करना 
  • आजीविका संवर्धन गतिवधियों से जुड़ी हुर्इ एजेंसियों जैसे गैर सरकारी संगठनों, स्वयं सहायता समूह महासंघों, किसान क्लब महासंघों, उत्पादक संगठनों, सहकारी संस्थाओं (प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों या पैक्स सहित), सरकारी एजेंसियों, बैंकों, गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (धारा 25 के अंतर्गत आने वाली कंपनियां) और विभाग से सहायता के लिए संपर्क करने वालों को वित्तीय सहायता प्रदान करना.
  • मेलों, प्रदर्शनियों आदि के आयोजन के लिए अनुदान सहायता प्रदान कर ग्रामीण कारीगरों की विपणन गतिविधियों को सहायता प्रदान करना. 
  • ग्रामीण विकास और स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्था (आरयूडीएसर्इटीआर्इ) / ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्था (आरएसर्इटीआर्इ) आदि जैसी ग्रामीण प्रशिक्षण संस्थाओं को अनुदान सहायता प्रदान कर कौशल विकास को बढ़ावा देना. 

3.  राष्ट्रीय स्तर पर विभाग की महत्वपूर्ण उपलब्धियां
 
  • संवर्धनात्मक कार्यक्रम
ग्रामीण नवोन्मेष 
 
अपनी ग्रामीण नवोन्मेष निधि (आरआर्इएफ) से, कृषीतर क्षेत्र विकास विभाग ने कृषि, कृषीतर क्षेत्र और सूक्ष्म वित्त क्षेत्रों को नवोन्मेषी, गैर परंपरागत प्रयोगों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की है. 31 मार्च 2016 की स्थिति के अनुसार, विभाग ने रु.73.23 करोड़ की कुल प्रतिबद्धता के साथ 687 परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की है.
 
  • ग्रामीण उद्यमिता / कौशल विकास कार्यक्रम 
नाबार्ड ने ग्रामीण इलाकों में स्वरोजगार और वैतनिक रोजगार के अवसरों के निर्माण के लिए ग्रामीण उद्यमिता विकास कार्यक्रम (आरर्इडीपी) और कौशल विकास कार्यक्रम (एसडीपी) को सहायता प्रदान की है. 
वर्ष 2015-16 के दौरान आरयूडीएसर्इटीआर्इ / आरएसर्इटीआर्इ के माध्यम से 689 ग्रामीण उद्यमिता विकास कार्यक्रमों / कौशल विकास कार्यक्रमों को 75% से अधिक निपटान की दर से वित्तीय सहायता मंजूर की गर्इ थी. 31 मार्च 2016 की स्थिति के अनुसार नाबार्ड ने संचयी रूप से 7.83 लाख ग्रामीण युवकों को प्रशिक्षण देने के लिए रु.109.77 करोड़ की अनुदन सहायता के साथ 30,341 ग्रामीण उद्यमिता विकास कार्यक्रमों / कौशल विकास कार्यक्रमों को सहायता प्रदान की है. गैर सरकारी संगठनों के मामले में निपटान दर 45% है और आरएसर्इटीआर्इ/ आरयूडीएसर्इटीआर्इ द्वारा प्रशिक्षित युवकों के मामले में निपटान दर लगभग 75% है. 
 
  • गुरुकुल प्रशिक्षण (पैन-आर्इआर्इटी मॉडल) 
क) यदि किसी परिचालन कौशल से प्रशिक्षण रोजगार मिलना निश्चित हो तो उद्यमी प्रशिक्षण के लिए पैसा खर्च करने के लिए भी तैयार रहते हैं, यह प्रमाणित करने के लिए नाबार्ड ने इस कौशल उन्नयन प्रशिक्षण मॉडल के लिए सहायता दी.  इस प्रयास में वित्तीय समावेशन और डिजिटल प्रौद्योगिकी घटक शामिल किए गए हैं. 
 
ख) ग्रामीण युवकों के सशक्तीकरण के लिए नाबार्ड द्वारा जारी विकासात्मक सहयोगों के एक हिस्से के रूप में ग्रामीण नवोन्मेष निधि के तहत रु.4.76 करोड़ की ऋण आधारित परियोजना को मंजूरी प्रदान की गर्इ. यह परियोजना “पैन आर्इआर्इटी एलुमनी रिसर्च फॉर इंडिया” को तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़, बिहार और असम में निर्माण कार्य की गतिविधियों जैसे राजगीरी, बार बेंडिंग, फोर्क लिफ्टिंग, प्लंबिंग, एअर कंडीशनिंग, एलेक्ट्रिकल वायरिंग, भारी वाहनों की ड्राइविंग, खान से जुड़े बहुत ही निर्धन परिवारों के स्कूल छोड़ चुके बच्चों के लिए निश्चित रोजगार दिलाने और कौशल निर्माण के लिए 20 गुरुकुलों की स्थापना हेतु मंजूर की गर्इ. परियोजना में संगठनात्मक लागत के रूप में रु.60 लाख, 20 गुरुकुलों की स्थापना के लिए स्टार्ट-अप व्यय के रूप में रु.60 लाख और परिक्रामी निधि सहायता के रूप में रु.356 लाख की सहायता दी गर्इ.
 
ग) एजेंसी ने पायलट के एक हिस्से के रूप में पहले ही 20 गुरुकुल इकाइयों की स्थापना की है – झारखंड में 7, तमिलनाडु में 5, राजस्थान और बिहार में दो-दो और छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में एक-एक. ये सभी इकाइयां स्कूल छोड़ चुके बच्चों, वामपंथी अतिवादिता से प्रभावित क्षेत्रों के निर्धन युवकों के लिए स्थापित की गर्इ हैं. प्रायोगिक परियोजना के एक हिस्से के रूप में, 237 बैचों में 5,659 प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया जिसकी प्लेसमेंट दर 100% है (स्वरोजगार विशेषकर ड्राइविंग और खानपान सहित). कुल वसूली दर 58% है. झारखंड के कुछ गुरुकुलों की चुकौती दर 75-80% है. प्रायोगिक प्रस्ताव में किए गए उल्लेख के अनुसार ‘पूंजी के परिक्रमण’ के रूप में प्रति प्रशिक्षणार्थी रु.3800 की परिक्रामी निधि सहायता प्रदान की गर्इ. 
 
घ) पैन आर्इआर्इटी मॉडल की सफलता के आधार पर नाबार्ड ने नैबफिन्स (नाबार्ड की सहायक कंपनी) को पीएआरएफआर्इ द्वारा स्थापित गुरुकुलों के माध्यम से कौशल ऋण प्रदान करने संबंधी परियोजना हेतु रु.5 करोड़ की अनुदान सहायता मंजूर की. नाबार्ड ने नैबफिन्स को अग्रिम के रूप में रु.2.50 करोड़ जारी किए. 
 
  • क्लस्टर विकास 
नाबार्ड 1999-2000 से राष्ट्रीय ग्रामीण औद्योगिकीकरण कार्यक्रम (एनपीआरआर्इ) के अंतर्गत क्लस्टर विकास कार्यक्रम का कार्यान्वयन कर रहा है. इस अनुभव के आधार पर और छोटे और सूक्ष्म उद्यमों के विकास के लिए क्लस्टर दृष्टिकोण ही उचित है इस बात का ध्यान रखते हुए नाबार्ड ने वर्ष 2005-06 में अपनी क्लस्टर विकास नीति तैयार की. नाबार्ड ने संचयी रूप से 22 राज्यों के 110 जिलों में कुल 119 क्लस्टरों को अनुमोदन प्रदान किया. पूर्वोत्तर क्षेत्र में क्लस्टर विकास पर बल दिया गया. पूर्वोत्तर क्षेत्र और पिछड़े क्षेत्रों में 23 क्लस्टरों के विकास के लिए सहायता प्रदान की गर्इ. कार्यक्रम के तहत सहायता प्राप्त करने वाले प्रमुख क्लस्टर निम्नानुसार हैं: 
 
i.  हथकरघा (57)
ii.  हस्तशिल्प (43)
ii.  खाद्य प्रसंस्करण और ग्रामीण पर्यटन  (प्रत्येक में 7) 
 
  • विपणन संबंधी पहलें 
क) प्रदर्शनियां और मेले 
 
आजीविका के स्रोत के रूप में अपनी विशेषज्ञता का उपयोग करने के साथ ही उनकी आय में वृद्धि करने में सहायता करने के लिए ग्रामीण कारीगरों को सहायता करने हेतु नाबार्ड राज्य स्तर पर मार्टों और हाटों तथा राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी प्रदर्शनियों को बढ़ावा देता है. 
 
i. महालक्ष्मी सरस मेला मुंबर्इ. 
ii. सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला, हरियाणा  
iii. नाबार्ड डेक्कन हाट, हेदराबाद 
 
प्रदर्शनियों और मेलों के लिए नाबार्ड द्वारा दी जाने वाली सहायता के कारण ग्रामीण कारीगर और स्वयं सहायता समूह अपने उत्पाद प्रदर्शित कर सकते हैं, बहुत लोगों तक पहुंच सकते हैं और अधिक ऑर्डर प्राप्त कर सकते हैं और इन सबके परिणामस्वरुप अपनी आय और आजीविका के अवसरों में वृद्धि कर सकते हैं. 
 
ख) र्इ-पोर्टल  
 
नाबार्ड ने मैसर्स झाक र्इ-वेंचर्स प्रा.लि. को “shilpihaat.com” और मैसर्स र्इ-फ्रेश पोर्टल प्रा.लि. को “ekraftsindia.com” को र्इ-पोर्टल के विकास में सहयोग के माध्यम से आजीविका विकास के लिए महत्वपूर्ण पहल की. इन पोर्टलों का उद्घाटन माननीय वित्तमंत्री श्री अरुण जेटली के कर कमलों से 16 जनवरी 2015 को किया गया था. 
 
इन पोर्टलों ने प्रायोगिक आधार पर कार्य करना आरंभ किया. इन पोर्टलों पर भारत के कुछ राज्यों के हस्तशिल्प, गहने, हथकरघा क्षेत्रों को मिलाकर कारीगर समूहों के 500 उत्पाद प्रदर्शित किए गए. इस प्रयास का लक्ष्य प्रौद्योगिकी के माध्यम से कुशल कारीगरों को ग्राहकों तक पहुंचाना है. इस प्रयास का उद्देश्य व्यापकतर फलक पर कारीगरों और उनके उत्पादों की पर अलग पहचान बनाना और उनके उत्पादों उन्हें लोगों के सामने लाना है. 
 
 
ऋण-सह-अनुदान परियोजनाएं  
 
i) ग्रामीण सफार्इ व्यवस्था 
 
नाबार्ड ने 17 एजेंसियों को ग्रामीण परिवारों में 14,495 शौचालयों के निर्माण के लिए अनुदान के रूप में रु.47 लाख और ऋण के रूप में रु.2,048 लाख की राशि मंजूर की है. 
 
ii) ग्रामीण आवास 
 
नाबार्ड ने 16 एजेंसियों को 4,425 आवास इकाइयों के निर्माण/ नवीकरण के लिए प्रत्यक्ष ऋण सहायता के रूप में रु. 257 करोड़ और अनुदान के रूप में रु.4 करोड़ मंजूर किए हैं.
 
iii) ग्रामीण पर्यटन 
 
वर्ष 2015-16 के दौरान बीआर्इओवीर्इडी, लखनऊ को ऋण के रूप में रु.124 लाख और अनुदान सहायता के रूप में रु.12.25 लाख की राशि मंजूर की गर्इ है. 
 
  • ऋण सहबद्ध पूंजी सब्सिडी योजना (सीएलसीएसएस)
भारत सरकार ने अक्तूबर 2000 में सूक्ष्म और छोटे उद्योगों के प्रौद्योगिकी उन्नयन के लिए ऋण सहबद्ध पूंजी सब्सिडी योजना (सीएलसीएसएस) का आरंभ किया था. इस योजना का उद्देश्य सूक्ष्म और छोटे उद्यमों के विशिष्ट उत्पादों/ उप-क्षेत्रों में इस योजना के अंतर्गत, जिसके लिए भारत सरकार द्वारा पूंजी सब्सिडी प्रदान की जाती है, द्वारा अनुमोदित सुस्थापित और बेहतर तकनीक के माध्यम से प्रौद्योगिकी उन्नयन के लिए सहायता प्रदान करना है. 
नाबार्ड को सहकारी बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और वाणिज्य बैंकों के लिए इस योजना के अंतर्गत सब्सिडी प्रदान करने के लिए नोडल एजेंसी में से नामित किया गया था. इस योजना के अंतर्गत नाबार्डे ने अब तक 1,263 इकाइयों को रु.64.41 करोड़ की राशि संवितरित की. 
  • स्टैण्ड अप इंडिया योजना 
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 5 अप्रैल 2016 को स्टैण्ड अप इंडिया योजना का शुभारंभ किया. नाबार्ड को प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण प्रदान करने, अग्रणी जिला प्रबंधकों के माध्यम से बैंकों के साथ अनुवर्ती कार्यों के लिए संपर्क करने और प्रशिक्षणार्थी उधारकर्ताओं को आरंभिक मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान करने का कार्य सौंपा गया. 
संभावित उद्यमियों को जिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है उनका निवारण करने और जिलों में योजना के कार्यान्वयन की समीक्षा और अनुप्रवर्तन में जिला परामर्श समिति (डीसीसी) / जिला स्तरीय परामर्श समितियों (डीएलसीसी) का मार्गदर्शन करने की जिम्मेदारी नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधकों को सौंपी गर्इ है. 
 
 
संपर्क:
 
डॉ एस सरवणवेल 
मुख्य महाप्रबंधक 
5वीं मंजिल, ‘बी’ विंग 
सी-24, ‘जी’ ब्लॉक 
बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स, बांद्रा (पूर्व) 
मुंबर्इ 400 051 
टेली.: (91) 022-26530083
फैक्स: (91) 022-26530082 
र्इ-मेल: ofdd@nabard.org