Menu

हमारे बारे में

प्रधान कार्यालय विभाग


प्रधान कार्यालय विभाग

विभाग का चयन करें
लेखा विभाग
व्‍यवसाय पहल विभाग
केन्‍द्रीय सतर्कता कक्ष
कार्पोरेट संचार विभाग
कार्पोरेट आयोजना विभाग
आर्थिक विश्लेषण और अनुसंधान विभाग (डीईएआर)
सूचना प्रौद्योगिकी विभाग
परिसर, सुरक्षा और अधिप्राप्ति विभाग
पुनर्वित्‍त विभाग
भंडारण एवं विपणन विभाग
सब्सिडियरीज़ और स्ट्रेटेजिक निवेश विभाग
पर्यवेक्षण विभाग
कृषि क्षेत्र विकास विभाग
कृषि क्षेत्र नीति विभाग
वित्‍त विभाग
मानव संसाधन प्रबंध विभाग
निरीक्षण विभाग
संस्‍थागत विकास विभाग
विधि विभाग
सूक्ष्‍म ऋण नवप्रवर्तन विभाग
कृषीत्तर क्षेत्र विकास विभाग
राजभाषा प्रभाग
जोखिम प्रबंधन विभाग
सचिव विभाग
राज्‍य परियोजना विभाग
वित्तीय समावेशन और बैंकिंग प्रौद्योगिकी विभाग
1.  आरंभ 
 
वित्तीय समावेशन से संबन्धित मुद्दों के समाधान हेतु भारत सरकार ने  भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर डॉ सी रंगराजन की अध्यक्षता में वित्तीय समावेशन पर एक समिति का गठन किया था. 4 जनवरी 2008 को समिति ने  तत्कालीन वित्त मंत्री को अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की. 
 
रिपोर्ट में वित्तीय समावेशन को " कमजोर वर्गों तथा निम्न आय वर्ग के लोगों की जरूरत के लिए  कम लागत पर और समय से  पर्याप्त ऋण और वित्तीय सुविधाएं सुनिश्चित करने की प्रक्रिया." के रूप में परिभाषित किया गया है. 
 
समिति ने दो निधियां - वित्तीय समावेशन निधि (एफआईएफ) और वित्तीय समावेशन प्रौद्योगिकी निधि (एफआईटीएफ) – बनाने की सिफारिश की थी. इन दोनों निधियों को नाबार्ड में सृजित किया गया और  वित्तीय समावेशन पहल हेतु नाबार्ड को एक समन्वयन  एजेंसी के रूप में कार्य करने का दायित्व दिया गया.  भारत सरकार की  दिनांक 17 जुलाई, 2015 की अधिसूचना के अनुसार एक नई वित्तीय समावेशन निधि में इन दोनों निधियों का  विलय कर दिया गया. 
 
2.  विभाग के मुख्य कार्य
 
  • वित्तीय समावेशन निधि का प्रबंधन
  • भारत सरकार के परामर्श से भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किए गए नए दिशा निर्देशों के अनुसार वित्तीय समावेशन निधि  का उपयोग करना, वित्तीय समावेशन और बैंकिंग प्रौद्योगिकी विभाग  के दो आंतरिक वर्टिकल  हैं, जिनके नाम हैं  :
  • वित्तीय समावेशन
  • बैंकिंग प्रौद्योगिकी
  • वित्तीय समावेशन
  • वित्तीय समावेशन  कार्य  को उच्च प्राथमिकता देते हुए यह वर्टिकल  वित्तीय समावेशन निधि(एफआईएफ)  के दायरे में गतिविधियों और वित्तीय साक्षरता तथा क्षमता निर्माण में शामिल होनेवाली संस्थाओं के विस्तार और व्याप्ति में वृद्धि का   प्रयास करता है. 
  • क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों  / सहकारी संस्थाओं  / गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के माध्यम से वित्तीय समावेशन अभियान चलाना. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सहकारी समितियों के कर्मचारियों में  वित्तीय समावेशन के संबंध में जागरूकता पर ध्यान केन्द्रित करता है. 
  • बैंकों के बिजनेस कोरेस्पोंडेंट  (बीसी) / बिजनेस  फैसिलिटेटर (बीएफ) को आईआईबीएफ की सहायता से प्रशिक्षित करता है. 
  • आईसीटी सोल्युशंस अपनाने हेतु  क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सीबीएस समर्थित सहकारी संस्थाओं को सहायता प्रदान करना ताकि वे अपनी पहुँच में विस्तार कर सकें. 
  • बैंकिंग प्रौद्योगिकी :
• सभी उधार लेनेवाले किसानों को रूपे किसान क्रेडिट कार्ड जारी करने हेतु  देश भर में सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को प्रोत्साहित करना. 
• भारतीय  राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) के साथ समन्वय कर  सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के प्रायोजक बैंकों के साथ बातचीत के माध्यम से कार्ड जारी करने पर सक्रिय रूप से ज़ोर देना. 
• देश के शहरी क्षेत्रों के समान ही सभी बैंकिंग सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए कृषक समुदाय को सक्षम बनाकर  एक कैशलेस वातावरण का लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में कार्य करना.  
• उपर्युक्त उद्देश्यों को प्राप्त करने हेतु विभिन्न हितधारकों के साथ नीति निर्धारण, क्षमता निर्माण और नेटवर्किंग. 
 
भारत सरकार, जो निधि से मंजूरी संबंधी निर्णय लेने के लिए अंतिम प्राधिकारी है, ने एफआईएफ के मार्गदर्शन के लिए एक सलाहकार बोर्ड का गठन किया है. सलाहकार बोर्ड ने  वित्तीय समावेशन एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) सहित सहकारी बैंकों पर विशेष ध्यान दिया है. यह कार्य क्षमता निर्माण और प्रौद्योगिकी अपनाने में पूरी तरह से सशक्त प्रौद्योगिकी-सक्षम व्यावसायिक संस्था के रूप में कार्य करने हेतु सहकारी बैंकों को सहायता देकर संभव बनाया गया है.

3.  राष्ट्रीय स्तर पर विभाग की व्यापक उपलब्धियां
 
भारत में वित्तीय समावेशन अनिवार्य रूप से बैंकों की अगुवाई में चलाया  जानेवाला एक  मॉडल है. तत्कालीन एफआईटीएफ के तहत मुख्यतः आर्थिक रूप से कमजोर 27 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को  सहायता प्रदान की गयी थी  ताकि वे  अन्य क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के साथ कोर बैंकिंग समाधान (सीबीएस) में बराबरी कर सकें. इससे देश के सभी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को सीबीएस प्रणाली से जोड़ दिया गया.
 
इसके अलावा, सहकारी संस्थाओं में सीबीएस के लिए नाबार्ड द्वारा आरंभ किए गए प्रोजेक्ट के तहत सभी 380 लाइसेंसधारी  ग्रामीण सहकारी बैंकों को सीबीएस से जुडने में सुविधा प्रदान कर दी गई है.
 
31 मार्च 2016 तक एफआईएफ के अंतर्गत  मंजूरी / संवितरण
 
31 मार्च 2016 तक वित्तीय समावेशन निधि (एफआईएफ) के तहत मंजूरी एवं संवितरण तथा निधि  की आरंभिक स्थापना के पश्चात संचयी मंजूरी एवं संवितरण के संबंध में प्रगति इस प्रकार है :
 
 (रु. करोड़)

संचयी मंजूरी(स्थापना के बाद से)

संचयी संवितरण(स्थापना के बाद से)

वर्ष 2015-16 के दौरान मंजूरी 
2015-16 के दौरान संवितरण 
1,610.78 645.64 464.30 157.23
 
 
4. चल रही परियोजनाएं  और योजनाएं 
 
  • सीबीएस से जुड़ने  के बाद, सहकारी बैंकों ने भुगतान प्रणाली शुरू कर दी  है  और रूपे किसान क्रेडिट कार्ड जारी करना भी शुरू कर दिया है
  • चार बैंकों, जिन्हें हाल ही में बैंकिंग लाइसेंस मिला है, ने भी सीबीएस प्रणाली  शुरू कर दी  है.
  • डिजिटल भारत की परिकल्पना की दिशा में, नाबार्ड ने स्वयं सहायता समूहों के डिजिटलीकरण के लिए एक पायलट परियोजना (एसएचजी) की शुरुआत की है
  • नई तकनीक अपनाने की दिशा में जरूरी मार्गदर्शन देने के लिए पोस्ट-सीबीएस कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं. 
  • आधार स्तर पर डेबिट कार्ड के उपयोग हेतु टच पॉइंट्स बनाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में कार्ड स्वीकृति के बुनियादी ढांचे को विकसित किए जाने की जरूरत है. ग्रामीण सहकारी बैंकों और लाभ कमाने वाली जमाराशि स्वीकार न करने वाले पैक्स / समितियों का चयन किया जा सकता है. इन समितियों को  बुनियादी बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने के साथ-साथ ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए जमाराशि  जुटाने हेतु एजेंट के रूप में कार्य करने के लिए तैयार रहना चाहिए.
  • बैंकों को आवंटित बहुत से उप-सेवा क्षेत्रों (एसएसए) में दूरसंचार कनेक्टिविटी की  समस्याएं (या तो कोई कनेक्टिविटी नहीं  अथवा अनियमित  कनेक्टिविटी  ) हैं. इन एसएसए तक पहुंचने हेतु  बैंकिंग सेवाओं को सक्षम बनाने के लिए, वी-सैट एक व्यवहार्य विकल्प  है. सौर ऊर्जा संचालित वी-सैट स्थापित कर  एसएसए में कनेक्टिविटी और बिजली आपूर्ति की समस्याओं को हल किया जा सकता  है. अतः, एसएसए में कनेक्टिविटी की समस्या दूर करने हेतु  कियोस्क / निर्धारित  ग्राहक सेवा केन्द्रों (सीएसपी) को सहायता  प्रदान की गई है.
  • वामपंथी अतिवाद प्रभावित जिलों में बैंकिंग नेटवर्क का  विस्तार  ऐसे क्षेत्रों के लोगों के सशक्तीकरण के लिए महत्वपूर्ण है. वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों में कनेक्टिविटी के अभाव/ अनियमित होने के कारण बैंकों को नई शाखाएं खोलने में  एक बहुत बड़ी बाधा आती  है. वामपंथी अतिवाद से प्रभावित जिलों में बैंक रहित गांवों में बैंकिंग नेटवर्क का विस्तार करने के लिए, वी-सैट कनेक्टिविटी हेतु  ‘पहले आओ पहले पाओ’ के आधार पर  82 चिन्हित जिलों में नई  शाखाएं  खोलने के लिए  प्रति जिला सात शाखाओं तक वित्तीय समावेशन निधि से सहायता प्रदान की जाती है. अनकनेक्टेड एसएसए में  सौर ऊर्जा स्थापित करने  हेतु  सभी बैंकों को सहायता प्रदान की गई है, ताकि देश के सभी एसएसए में बैंकिंग सेवाएं प्रदान की जा सकें. यह सहायता  केवल बीसी केन्द्रों के लिए ही उपलब्ध है.
  • प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) भारत सरकार द्वारा वित्तीय समावेशन की दिशा में प्रयासों को बढ़ाने के लिए शुरू की गयी है. पीएमजेडीवाई के  प्रचार-प्रसार तथा उसके लिए  प्रौद्योगिकी अपनाने हेतु  वित्तीय सहायता प्रदान की गयी है. 
  • भारत सरकार ने तीन सामाजिक सुरक्षा योजनाओं अर्थात प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और अटल पेंशन योजना का भी दिनांक 9 मई 2015 को शुभारंभ किया.
भारत सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत नाबार्ड की पहलें  इस प्रकार हैं:
  • ग्रामीण सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को परिपत्र एवं दिशा-निर्देश जारी करना 
  • पहुँच  सुनिश्चित करने के लिए नए प्रयास करना 
  • अटल पेंशन योजना हेतु बीमा कंपनियों, पीएफआरडीए में पंजीकरण और नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड, ई-गवर्नेंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एनएसडीएल ई-जीआईएल ) के साथ समन्वय करना 
  • योजनाओं में नामांकन के आंकड़ों की रिपोर्टिंग के लिए एक तंत्र विकसित करना 
 
संपर्क 
 
श्री सुब्रत गुप्ता
मुख्य महाप्रबंधक
वित्तीय समावेशन और बैंकिंग प्रौद्योगिकी विभाग 
चौथी मंजिल, 'ई' विंग
सी -24, जी ब्लॉक,
बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स, बांद्रा (पूर्व)
मुंबई-400051
टेलीफोन: (91) 022-2653 0024
फैक्स: (91) 022-2653 0150
ई-मेल: dfibt@nabard.org