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प्रधान कार्यालय विभाग


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आर्थिक विश्लेषण और अनुसंधान विभाग
1.  आरंभ
 
नाबार्ड, सरकार और बैंकिंग उद्योग से संबंधित मदों पर फील्ड-आधारित प्रतिसूचना और बृहद स्तर के आंकड़ों के विश्लेषण के माध्यम से नीतिगत तथा कार्योन्मुख अनुसंधान सहायता के लिए आर्थिक विश्लेषण और अनुसंधान विभाग (डियर) की स्थापना की गई थी. नाबार्ड के अधिदेश के अनुसार, इस विभाग को कृषि और ग्रामीण विकास से संबंधित ज्ञानमूलक गतिविधियों में विशेषज्ञता है. 
 
इस विभाग का बल व्यावसायिक योग्यता वाले आर्थिक विश्लेषकों के संवर्ग और अन्य प्रतिष्ठित संस्थाओं के साथ नेटवर्क तैयार करने तथा सहयोग करने की इसकी क्षमता में निहित है.
 
आर्थिक विश्लेषण और अनुसंधान विभाग का विज़न
 
“नाबार्ड के एक गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान स्कंध के रूप में स्वयं को विकसित करना जो नए विचारों को उत्पन्न करने के लिए स्वयं अनुसंधान करता है और ऐसे अनुसंधान में सहयोग करता है, नीति निविष्टियां तैयार करने में सहायता करता है, ऐसी वैकल्पिक नीति का मूल्यांकन करता है जो संगठन के उद्देश्यों को प्राप्त करने में प्रबंधन की सहायता करें तथा ऐसे अनुसंधान परिणाम सामने रखता है, जो नाबार्ड को विशेष रूप से ग्रामीण ऋण और सामान्य रूप से समग्र ग्रामीण विकास के आयामों की नाबार्ड की समझ में सुधार करता है.” 
 
2.  विभाग के मुख्य कार्य
 
A.  अनुसंधान अध्ययन के माध्यम से प्रबंधन को नीति निविष्टि प्रदान करना
  • प्रधान कार्यालय और क्षेत्रीय कार्यालयों में संगठन के अधीन विषयों के विशेषज्ञों के माध्यम से आंतरिक अध्ययन एवं अन्य अनुसंधान गतिविधियां संचालित करना
  • राज्य/क्षेत्र विशेष के विषयों पर प्रतिष्ठित संस्थाओं के सहयोग से अध्ययन करना.
B.  अनुसंधान और विकास निधि का प्रबंधन
 
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक अधिनियम, 1981 के प्रावधानों के अनुसार बैंक द्वारा  `50 करोड़ की पूंजी निधि से अनुसंधान और विकास निधि स्थापित की गई. इस निधि का उपयोग मुख्यत: निम्नलिखित के लिए अनुदान देने हेतु किया जाता है :
I. अनुसंधान परियोजनाएं/अध्ययन
 
अनुसंधान और विकास निधि के अंतर्गत सहायता प्राप्त अध्ययन एवं अनुसंधान परियोजनाओं का उद्देश्य गहराई से अध्ययन, व्यावहारिक अनुसंधान एवं नवोन्मेषी दृष्टिकोण के माध्यम से कृषि और ग्रामीण विकास की समस्याओं को समझना है.
 
II. संगोष्ठयां/सम्मेलन, आदि
 
अनुसंधान और विकास निधि का उपयोग नाबार्ड के लिए संगत और लाभदायक विषयों पर बाहरी एजेन्सियों और आंतरिक व्यवस्था द्वारा आयोजित संगोष्ठियों/सम्मेलनों की कार्यवाही/उनमें प्रस्तुत अनुसंधान आलेखों के मुद्रण हेतु सहायता या कार्यक्रम आयोजित करने के लिए किया जाता है.
 
III. नाबार्ड चेयर इकाई योजना
 
कृषि और ग्रामीण विकास क्षेत्र में विस्तृत अनुसंधान करने के उद्देश्य से प्रतिष्ठत संस्थानों के साथ मजबूत अनुसंधान संबंध स्थापित करने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए नाबार्ड चेयर इकाई योजना तैयार की गई है. 
 
IV. प्रकाशन
 
नाबार्ड के हित के क्षेत्रों में अनुसंधान, आंतरिक एवं बाह्य दोनों, के परिणामों को प्रसारित एवं प्रचारित करने के लिए विभाग सामयिक पत्र, ज्ञान श्रृंखला, रूरल पल्स, सूक्ष्म वित्त समीक्षा इत्यादि के रूप में प्रकाशन की व्यवस्था करता है.
 
V. छात्र इन्टर्नशिप योजना कार्यक्रम
 
नाबार्ड प्रतिष्ठित संस्थाओं में विभिन्न विषयों में स्नातकोत्तर डिग्री की पढ़ाई कर रहे और अच्छी शैक्षिक पृष्ठभूमि वाले छात्रों को इन्टर्नशिप प्रदान करता रहा है. इस कार्यक्रम का उद्देश्य कृषि और ग्रामीण विकास से संबंधित विषयों पर अध्ययनों/परियोजनाओं के माध्यम से प्रतिसूचना प्राप्त करना है.
 
3.  नाबार्ड की वार्षिक रिपोर्ट तैयार करना
 
यह विभाग नाबार्ड की वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित करता है जिसमें पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान नाबार्ड द्वारा किए गए कार्यों की व्यापक तस्वीर पेश की जाती है.
 
4. रूरल इकोनोमी ट्रैकर का रखरखाव
 
विभाग ने भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलुओं से संबंधित सभी महत्वपूर्ण आंकड़ों को एक साथ लाकर रूरल इकोनोमी ट्रैकर (आरईटी) नामक एक डेटा ट्रैकिंग प्रणाली ईजाद की है. आरईटी 57 विभिन्न पैरामीटरों, वर्षा की स्थिति सहित, कृषि उत्पादनों, थोक मूल्य सूचकांक और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) को ट्रैक करता है.
 
5. समितियों/विशेषज्ञ कार्यदलों को सहायता प्रदान करना
 
यह विभाग अधिकांश समितियों जिनमें नाबार्ड शामिल है, को शैक्षिक और सचिवीय सहायता प्रदान करता है.

6. नाबार्ड के केन्द्रीय पुस्तकालय का अनुरक्षण
 
डियर नाबार्ड के एक व्यापक केन्द्रीय पुस्तकालय का अनुरक्षण अपने प्रधान कार्यालय में करता है जिसमें विभिन्न विषयों पर 23,800 पुस्तकों के अतिरिक्त जर्नल्स, समाचार पत्र, पत्रिकाएं और ऑनलाइन डेटा सब्सक्रिप्शन का अनुरक्षण करता है. 
 
राष्ट्रीय स्तर पर विभाग की मुख्य उपलब्धि 
 
  • डियर द्वारा किए गए अध्ययनों के आधार पर नाबार्ड, भारत सरकार, भारतीय रिज़र्व बैंक इत्यादि की, कृषि गोल्ड लोन, ब्याज सब्वेन्शन योजना इत्यादि जैसे मामलों में, नीति में सुधार में सहायता की गई है.
  • विभाग ने 2015-16 में राष्ट्रीय स्तर के तीन सेमीनारों का आयोजन किया :
(i) कृषि आपदा को कम करना और कृषि आय को बढ़ाना; 
(ii) सूक्ष्म वित्त 
(iii) कृषि मूल्य श्रृंखला 
  • देश के प्रतिष्ठित संस्थानों/विश्वविद्यालयों के विभागों/बिजनेस स्कूलों द्वारा कुल 19 अध्ययन किए गए.
चल रही परियोजनाएं एवं योजनाएं
 
A. नाबार्ड ने विभिन्न विषयों पर अनुसंधान प्रायोजित किया है जैसे: 
 
  • कृषि मूल्य श्रृंखला
  • ग्रामीण आधारभूत संरचना और ग्रामीण-शहरी इंटरफेस
  • ग्रामीण सेवा क्षेत्र 
  • वर्षा सिंचित कृषि के लिए संसाधन प्रबंध विकल्प 
B. अखिल भारतीय वित्तीय समावेशन सर्वेक्षण (एनएएफआईएस) नामक एक महत्वाकांक्षी पैन-इंडिया सर्वेक्षण शुरू करने का नाबार्ड का प्रस्ताव है. इस सर्वेक्षण में जीविकोपार्जन और आधार स्तर पर वित्तीय समावेशन की गहरी समझ पैदा करने के लिए वित्तीय समावेशन पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा.
  
7.  महत्वपूर्ण लिंक 
 
संपर्क :
डॉ.यू एस साहा
मुख्य महाप्रबंधक
4थी मंजिल, ‘सी’ विंग, सी-24, ‘जी’ ब्लॉक
बांद्रा-कुर्ला काम्प्लेक्स, बांद्रा (पूर्व)
मुंबई-400051
फोन : (91) 022-26523617
फैक्स : (91) 022-26530086
ई-मेल : dear@nabard.org