सूचना का अधिकार

पुनर्वित्त विभाग

सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 4 (1) (ख) के अंतर्गत प्रकाशन के लिए अपेक्षित सूचना

क्र.सं.

विवरण

सूचना

(ii)

विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की शक्तियाँ और कर्त्तव्य

पुनर्वित्त विभाग के अधिकारी और कर्मचारी निम्नलिखित कर्तव्यों का निर्वहन करते करते हैं:

अ) दीर्घावधि पुनर्वित्त:

नाबार्ड के दीर्घावधि पुनर्वित्त के माध्यम से विवेश ऋण पर बल दिया जाता है जिससे आस्ति-सृजन के जरिये पूँजी निर्माण होता है. कृषि में पूँजी निर्माण कृषि उत्पादन और उत्पादकता बढाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, यह किसानों को मौसम की अनिश्चितता और जलवायु परिवर्तन से संरक्षण देता है और उन्हें संधारणीय आय-प्रवाह उपलब्ध कराता है. इसके साथ ही, अनुषंगी गतिविधियों में पूँजी निर्माण पूरे साल किसानों के आय-प्रवाह को बनाए रखने में सहयोग देता है और उन्हें किसी संकट को सहने के लिए आवश्यक अनुकूलन क्षमता देता है.

आ) अल्पावधि पुनर्वित्त:

नाबार्ड ग्रामीण वित्तीय संस्थाओं को अल्पावधि पुनर्वित्त प्रदान करता है ताकि वे फसल के सीज़न में किसानों को समय पर वित्त उपलब्ध कराने में सक्षम हो सकें.  

इ) भारत सरकार की पूँजी सब्सिडी योजनाओं का कार्यान्वयन:

नाबार्ड भारत सरकार की विभिन्न ऋण-सहबद्ध सब्सिडी योजनाओं, विशेष रूप से कृषि परियोजनाओं और प्राथमिकता क्षेत्र गतिविधियों के लिए, के अंतर्गत पात्र बैंकों को सब्सिडी पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है. इन योजनाओं के कार्यान्वयन से कृषि और अनुषंगी क्षेत्र तथा प्राथमिकता क्षेत्र के लिए आधार-स्तरीय ऋण में वृद्धि संभव हुई है:

i. समन्वित कृषि विपणन योजना (आईएसएएम) की नई कृषि विपणन आधारभूत संरचना उप-योजना

ii. कृषि-क्लीनिक और कृषि-व्यवसाय केंद्र (एसीएबीसी)

D. भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत नाबार्ड द्वारा जारी ब्याज सहायता:

i. भारत सरकार की फसल ऋण, पशुपालन और मात्स्यिकी के लिए ब्याज सहायता योजना

ii. चीनी मिलों को सुलभ ऋण देने के लिए ब्याज सहायता योजना

iii. चीनी मिलों को विद्यमान एथेनॉल उत्पादन क्षमता में वृद्धि और अतिरिक्त उत्पादन क्षमता उपलब्ध कराने के लिए वित्तीय सहायता देने हेतु ब्याज सहायता योजना

उ) केसीसी संतृप्ति चरण II::

किसानों के लिए प्रधान मंत्री के पैकेज के भाग के रूप में माननीय वित्त मंत्री ने केसीसी संतृप्ति के दूसरे चरण के अंतर्गत 2.5 करोड़ किसानों को शामिल करने की घोषणा की ताकि कृषि क्षेत्र को ऋण उपलब्ध कराया जा सके. भारत सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग तथा मात्स्यिकी विभाग ने भी साथ ही साथ दुग्ध संघों और दुग्ध उत्पादक कंपनियों से जुड़े 1.5 करोड़ डेयरी किसानों और 1 करोड़ मत्स्य किसानों को केसीसी उपलब्ध कराने के लिए एक विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया.

 

(iii)

विभाग में विनिश्चय करने की प्रक्रिया में पालन की जाने वाली प्रक्रिया जिसमें पर्यवेक्षण और उत्तरदायित्व के माध्यम सम्मिलित हैं.

कार्यविधि- पुनर्वित्त जारी करने के संबंध में नीतिगत दिशानिर्देश वार्षिक आधार पर बैंकों को वर्ष के आरम्भ में जारी किए जाते हैं. सब्सिडी/ ब्याज सहायता जारी करने सम्बन्धी तौर-तरीके भारत सरकार द्वारा तैयार की गई सम्बंधित योजना में निर्धारित कार्यविधियों से संचालित होते हैं. इस संबंध में नाबार्ड द्वारा समय-समय पर परिचालनात्मक दिशानिर्देश जारी किए जाते हैं.  

सम्बंधित उपबंध, अधिनियम, नियम – नाबार्ड सामान्य विनियमावली. 1982 का विनियम 11(2)


उत्तरदायित्व - – उत्तरदायित्व के लिए नाबार्ड की नीति का अनुसरण किया जाता है.

(iv)

अपने कृत्यों के निर्वहन के लिए विभाग द्वारा स्थापित मानदंड

 कृत्यों का निर्वहन नाबार्ड के नियमों और विनियमों, भारत सरकार और भारतीय रिज़र्व बैंक से प्राप्त दिशानिर्देशों और विभाग द्वारा जारी विभिन्न नीतिगत परिपत्रों में निर्धारित मानदंडों/ मानकों की संरचना के भीतर किया जाता है. विभिन्न कृत्यों के लिए मानदंडों की रूपरेखा निम्नानुसार है:

1 पुनर्वित्त – दीर्घावधि  

1.1 पात्र संस्थाएँ  

नाबार्ड अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, राज्य सहकारी बैंकों, राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों, जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंकों, प्राथमिक शहरी सहकारी बैंकों, लघु वित्त बैंकों, एनबीएफसी, एनबीएफसी-एमएफआई और भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा अनुमोदित किसी भी अन्य वित्तीय संस्था को पुनर्वित्त सहायता देता है.

1.2 पात्र प्रयोजन  

नाबार्ड कृषि और कृषीतर दोनो क्षेत्रों की गतिविधियों के लिए पुनर्वित्त देता है.

1.3. पुनर्वित्त की प्रमात्रा  

पुनर्वित्त की प्रमात्रा समय-समय पर निर्धारित हमारी पुनर्वित्त नीति के पात्रता-मानदंडों के अधीन होती है.

1.4 पुनर्वित्त पर ब्याज दर  

निधियों की लागत, बाजार की स्थितियों आदि को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर पुनर्वित्त पर ब्याज दर की समीक्षा की जाती है.

1.5 चुकौती अवधि

चुकौती अवधि 3 वर्ष से 5 वर्ष तक और उससे अधिक होती है.

2 पुनर्वित्त – मध्यावधि  

2.1. पात्र संस्थाएँ -   सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, राज्य सहकारी बैंक, राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक, जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक, प्राथमिक शहरी सहकारी बैंक, लघु वित्त बैंक, एनबीएफसी, एनबीएफसी-एमएफआई और भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा अनुमोदित कोई भी अन्य वित्तीय संस्था  

2.2 पात्र प्रयोजन

कृषि और अनुषंगी गतिविधियों से सम्बंधित मध्यावधि प्रयोजनों के अंतर्गत सभी निवेश गतिविधियाँ पात्र हैं.  

2.3. पुनर्वित्त की प्रमात्रा

पुनर्वित्त की प्रमात्रा समय-समय पर निर्धारित हमारी पुनर्वित्त नीति के पात्रता- मानदंडों के अधीन होती है.

2.4 पुनर्वित्त पर ब्याज दर 

निधियों की लागत, बाजार की स्थितियों आदि को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर पुनर्वित्त पर ब्याज दर की समीक्षा की जाती है. 

2.5 चुकौती अवधि 

न्यूनतम चुकौती अवधि 18 माह और अधिकतम 3 वर्ष है.  

3.दीर्घावधि ग्रामीण ऋण निधि:

इस निधि की घोषणा भारत सरकार द्वारा संघीय बजट 2014-15 में की गई ताकि सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को रियायती ब्याज दर पर किसानों को सावधि कृषि ऋण देने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके. यह निधि रु.5000 करोड़ के आरंभिक आबंटन से स्थापित की गई थी. 2022-23 के दौरान इस निधि के अंतर्गत रु.15000 करोड़ आबंटित किए गए. नाबार्ड इस निधि से सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को पुनर्वित्त सुविधा देता है ताकि वे किसानों को रियायती ब्याज दर पर सावधि कृषि ऋण देने में समर्थ हो सकें  

4.पुनर्वित्त –अल्पावधि

4.1-अल्पावधि (मौसमी कृषि परिचालन)

किसानों को समय पर ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बैंकों द्वारा ऋण देने की उत्पादन-उन्मुख प्रणाली का अनुसरण किया जाता है. इस प्रणाली में ऋण आवश्यकता के आकलन और उर्वरकों, कीटनाशकों आदि जैसी निविष्टियों की खरीद के लिए ऋण के प्रावधान जैसी विशेषताएँ हैं. इसके अंतर्गत प्रत्येक फसल और जिले के लिए वित्तमान तय किए जाते हैं और ऋण देने और उसकी वसूली में फसल के मौसम का पालन सुनिश्चित किया जाता है. वार्षिक ऋण सीमा की मंजूरी के माध्यम से क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंकों के लिए राज्य सहकारी बैंकों को वार्षिक ऋण सीमा की मंजूरी के जरिये उत्पादन के प्रयोजन से रियायती ब्याज दर पर पुनर्वित्त उपलब्ध कराया जाता है. मंजूर की गई ऋण सीमा से प्रत्येक आहरण 12 माह की अवधि के भीतर चुकौती-योग्य होता है.  

पुनर्वित्त भारत सरकार/ भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के प्राथमिकता क्षेत्र ऋणीकरण में की गई कमी की राशि से गठित अल्पावधि सहकारी ऋण (एसटीसीआरसी) निधि और अल्पावधि क्षेग्रा बैंक (एसटीआरआरबी) पुनर्वित्त निधि से दिया जाता है.  

4.2 अल्पावधि ऋण पुनर्वित्त निधि: एसटीसीआरसी और एसटीआरआरबी

इस निधि का उद्देश्य अल्पावधि (मौसमी कृषि परिचालन) हेतु सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को पुनर्वित्त उपलब्ध कराने के लिए नाबार्ड के संसाधनों में वृद्धि करना है. इस निधि में ऐसे अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक अंशदान करते हैं जिन्होंने रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर प्राथमिकता क्षेत्र के लिए निर्धारित लक्ष्यों और उप-लक्ष्यों को हासिल करने में कमी की हो. तदनुसार बैंक प्रत्येक वर्ष के बजट में घोषित समूह निधि में अंशदान करते हैं. नाबार्ड सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को यह अल्पावधि पुनर्वित्त उपलब्ध कराने के लिए खुले बाजार से उधार लेकर इस निधि की अनुपूर्ति करता है. वर्ष 2022-23 के दौरान एसटीसीआरसी निधि के अंतर्गत रु.50002.23 करोड़ और एसटीआरआरबी निधि के अंतर्गत रु.15000.49 करोड़ आबंटित किए गए.

4.3 अतिरिक्त अल्पावधि (मौसमी कृषि परिचालन)

यदि बैंक सूखे की स्थितियों और माँग में वृद्धि, मध्यवर्ती सहकारी बैंकों द्वारा जमाराशि का आहरण कर लेने आदि कारणों से तरलता की कमी अनुभव करते हैं, तो ऐसी स्थितियों के लिए नाबार्ड ने 2016-17 में एक नई ऋण सीमा शुरू की ताकि राज्य सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को सामान्य अल्पावधि (मौसमी कृषि परिचालन) पुनर्वित्त सीमा के ऊपर अतिरिक्त अल्पावधि (मौसमी कृषि परिचालन) पुनर्वित्त उपलब्ध कराया जा सके.

4.4 अल्पावधि (अन्य) और बुनकर

बैंको को अल्पावधि (अन्य) और बुनकर सीमा मंजूर की जाती है ताकि वे अल्पावधि (मौसमी कृषि परिचालन) सीमा में शामिल प्रयोजनों से इतर प्रयोजनों, नामतः कृषि और अनुषंगी गतिविधियों, फसलों के विपणन, मात्स्यिकी क्षेत्र आदि के लिए और प्राथमिक/ शीर्ष/ क्षेत्रीय बुनकर सहकारी समितियों, राज्य हथकरघा विकास निगम आदि की कार्यशील पूँजी आवश्यकताओं के लिए अल्पावधि ऋण उपलब्ध करा सकें.

5. पुनर्वित्त – मध्यावधि परिवर्तन

प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों के, मध्यावधि स्थिरीकरण व्यवस्था के अंतर्गत परिवर्तित/ पुन:अनुसूचित/ पुनःचरणीकृत किए गए ऋणों के समक्ष राज्य सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को पुनर्वित्त सुविधा उपलब्ध है. राज्य सहकारी बैंक के मामले में परिवर्तन सुविधा में नाबार्ड की भागीदारी 60%, राज्य सरकार की 15% और राज्य सहकारी बैंक की 25% होती है और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के मामले में नाबार्ड की भागीदारी 70%, प्रायोजक बैंक की 25% और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की 5% होती है.

6. राज्य सरकार को दीर्घावधि ऋण

नाबार्ड सहकारी ऋण संस्थाओं (राज्य/ जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक, राज्य/ प्राथमिक सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक, पैक्स, एफएसएस, लैम्प्स) की शेयर पूँजी में अंशदान के लिए राज्य सरकार को 12 वर्ष तक के लिए दीर्घावधि ऋण उपलब्ध कराता है ताकि इन संस्थाओं के शेयर पूँजी आधार को मजबूत किया जा सके और इस प्रकार उनकी ऋण लेने की शक्ति बढे और वे कुछ शर्तों के अधीन बृहत्तर ऋणीकरण कार्यक्रम चलाने में समर्थ हों.

7. भारत सरकार की योजना के अंतर्गत 7% वार्षिक की दर पर फसल ऋण के वित्तपोषण के लिए ब्याज सहायता योजना– 

भारत सरकार ने वर्ष 2006-07 में ब्याज सहायता योजना शुरू की थी. वि.वर्ष 2022-23 से 2023-24 के लिए भारत सरकार के विद्यमान दिशानिर्देशों के अनुसार: सरकारी क्षेत्र के बैंकों और निजी क्षेत्र के बैंकों (उनके द्वारा ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में प्रात्त ऋणों के मामले मैं), सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को प्रति किसान रु.3,00,000 तक के उनकी अपनी निधियों से प्रदत्त ऋणों के लिए 1.5% वार्षिक की ऋण सहायता दी जाती है, बशर्ते उधारदाता संस्थाएँ आधार स्तर पर किसानों को 7% वार्षिक की दर पर अल्पावधि ऋण उपलब्ध कराएँ.  

उक्त के अतिरिक्त, 2009-10 से समय पर चुकौती करने वाले किसानों को अतिरिक्त ब्याज सहायता देने की योजना शुरू की गई जिसमें वर्तमान में समय पर चुकौती करने वाले किसानों को प्रोत्साहन के रूप में 3% की ब्याज सहायता दी जाती है. यह सहायता किसानों को वर्ष के दौरान अधिकतम रु.3.00 लाख तक के अल्पावधि उत्पादन ऋणों पर दी जाती है. इस प्रकार समय पर चुकौती करने वाले किसानों को विभिन्न बैंकों से 4% वार्षिक की दर पर अल्पावधि उत्पादन ऋण मिल रहा है.  

किसानों को गरजू बिक्री से हतोत्साहित करने के लिए और अपनी उपज को भांडागारों में रखने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु किसान क्रेडिट कार्ड धारक लघु और सीमान्त किसानों को फसलोपरांत और छह माह की अवधि के लिए फसल ऋण पर दी जाने वाली ब्याज सहायता की दर पर ही भांडागार विकास और विनियामक प्राधिकरण (डब्ल्यूडीआरए) द्वारा प्रत्यायित भांडागारों में भंडारित उपज के लिए भांडागार द्वारा जारी परक्राम्य भांडागार रसीदों (एनडब्ल्यूआर) के समक्ष लिए गए ऋणों पर ब्याज सहायता उपलब्ध है.

प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए बैंकों को पुन:संरचित ऋणों पर पहले वर्ष के लिए ब्याज सहायता उपलब्ध कराई जाएगी. ऐसे पुन:संरचित ऋणों पर भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित नीति के अनुसार दूसरे वर्ष से सामान्य ब्याज दर लगेगी. कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने 25 अगस्त 2022 के अपने एफ. सं. 1-4/2020 – क्रेडिट -I के माध्यम से बैंकों को दी जाने वाली ब्याज सहायता में आशोधन किया है. वि.वर्ष 2022-23 से 2023-24 के लिए: सहकारी बैंकों, क्षेग्रा बैंकों, लघु वित्त बैंकों, वाणिज्यिक बैंकों को कृषि और पशुपालन, डेयरी, मात्स्यिकी, मधुमक्खी पालन आदि सहित अनुषंगी क्षेत्रों के लिए अपनी निधि का उपयोग करते हुए प्रदत्त ऋणों हेतु 1.5% ब्याज सहायता देय होगी, बशर्ते बैंक 7% पर ऋण देते हों

8.पशुपालन और मात्स्यिकी की कार्यशील पूँजी पर ब्याज सहायता

भारत सरकार ने फसल ऋण लेने वाले किसानों को जारी केसीसी पर लागू ब्याज सहायता को 2018-19 से केसीसी धारक पशुपलाक और मत्स्य किसानों के मामले में भी लागू किया था. फसल ऋण के लिए विद्यमान केसीसी से अलग पशुपालक और मत्स्य किसानों को प्रदत्त अल्पावधि ऋणों पर बैंकों को 2% की ब्याज सहायता (वि.वर्ष 2022-23 और 2023-24 के लिए 1.5% की ब्याज सहायता) और समय पर चुकौती के लिए प्रोत्साहन के रूप में किसानों को 3% की ब्याज सहायता दी जाती है, बशर्ते बैंकों द्वारा 7% वार्षिक की दर पर ऋण दिए गए हों. फसलोत्पादन के लिए केसीसी रखने वाले जो किसान पशुपालन या मात्स्यिकी गतिविधियों में भी लगे हों, उनके मामले में ब्याज सहायता रु.3.00 लाख वार्षिक की समग्र सीमा तक ही उपलब्ध है.

8. किसान क्रेडिट कार्ड -

किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना 1998-99 में एक नवोन्मेषी ऋण प्रदाय तंत्र के रूप में शुरू की गई थी जिसका लक्ष्य किसानों को आवश्यक निविष्टियों की खरीद सहित खेती के लिए लचीले, सुविधाजनक और किफायती तरीके से पर्याप्त और समय पर बैंकिंग प्रणाली से ऋण सहायता उपलब्ध कराना था. बैंकों को सूचित किया गया है कि वे सभी पात्र किसानों को केसीसी जारी करें. केसीसी योजना को एक बार के दस्तावेजीकरण, ऋण सीमा में लागत वृद्धि के अनुरूप वृद्धि की अन्तर्निहित व्यवस्था, एटीएम-समर्थित डेबिट कार्ड आदि सुविधाओं के माध्यम से सरल बनाया गया है. केसीसी के विद्यमान दिशानिर्देशों के अंतर्गत ऋण सीमा 05 वर्ष के लिए मंजूर की जाती है और लाभार्थियों के लिए आहरण और चुकौती को आसान और लचीला बनाया गया है.

जैसा कि प्रधान मंत्री आत्मनिर्भर पैकेज में घोषित किया गया, वर्तमान में चल रहे केसीसी संतृप्ति अभियान के तहत 1.15 करोड़ किसानों को शामिल किया जा चुका है जिसके तहत सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों द्वारा रु.1.61 लाख करोड़ से अधिक की ऋण सीमा मंजूर की गई है. जहाँ इस अभियान से किसानों तक सुविधापूर्वक और किफायती ऋण पहुँचाना सुनिश्चित होगा, वहीं किसानों की आमदनी के स्तर में वृद्धि के साथ-साथ इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था संचालित होगी और कृषि उत्पादन तथा अनुषंगी गतिविधियाँ की गति में तेजी आएगी.

9. एथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए चीनी मिलों को वित्तीय सहायता देने की योजना  

योजना के दिशानिर्देशों के अनुसार, खाद्य और सार्वजानिक वितरण विभाग (डीएफपीडी) इस योजना के अंतर्गत परियोजनाओं के कार्यान्वयन को सैद्धांतिक अनुमोदन प्रदान करता है. चीनी मिलों को परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए बैंक ऋण हेतु बैंकों से संपर्क करना पड़ता है. नाबार्ड को डीएफपीडी, भारत सरकार के साथ संवाद करने और योजना के अंतर्गत ब्याज सहायता के प्रबंधन के लिए नोडल एजेंसी नियुक्त किया गया है.

योजना के अंतर्गत सहायता:  बैंक द्वारा दिए जाने वाले ऋण पर 6% वार्षिक की दर पर या ब्याज दर के 50% में से जो भी कम हो, उस दर पर ब्याज का वहन एक वर्ष की आस्थगन अवधि सहित केवल पाँच वर्षों के लिए भारत सरकार द्वारा किया जाएगा.

पात्र संस्थाएँ: सरकारी क्षेत्र के सभी बैंक, निजी वाणिज्यिक बैंक, अनुसूचित शहरी सहकारी बैंक, सहकारी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम, भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी, और कोई भी अन्य वित्तीय संस्था, जो नाबार्ड से पुनर्वित्त के लिए पात्र है, पात्र चीनी मिलों की ओर से योजना के अंतर्गत ब्याज सहायता का दावा करने के लिए पात्र हैं.

11. पूँजी निवेश सब्सिडी योजनाएँ -

नाबार्ड भारत सरकार द्वारा कार्यान्वित विभिन्न सरकार-प्रायोजित योजनाओं के लिए सब्सिडी पहुँचाने हेतु माध्यम एजेंसी है जिनका विवरण निम्नानुसार है:

(i) समन्वित कृषि विपणन योजना (आईएसएएम) की कृषि विपणन आधारभूत संरचना उप-योजना

(ii) कृषि-क्लीनिक और कृषि-व्यवसाय केंद्र (एसीएबीसी)

सब्सिडी कार्यक्रमों के निष्पादन सम्बन्धी मानदंड मद सं. (xii) में दिए गए हैं.

(v)

विभाग द्वारा या विभाग के नियंत्रणाधीन धारित या विभाग के कर्मचारियों द्वारा अपने कृत्यों के निर्वहन के लिए प्रयोग किए गए नियम, विनियम, अनुदेश, निर्देशिका और अभिलेख

सन्दर्भ के लिए निम्नलिखित मैनुअल तैयार किए गए हैं जिनमें मोटे तौर पर नीतियों, कार्यविधियों/ नियमों, दस्तावेजीकरण आदि का विवरण दिया गया है:

(i)अल्पावधि मैनुअल

(ii)दीर्घावधि मैनुअल

(iii)सरकार-प्रायोजित योजनाओं पर पुस्तिका

आतंरिक और बाह्य परिपत्रों को बैंक के इंट्रानेट पर स्टाफ को उपलब्ध कराया जाता है और बाह्य परिपत्रों को बैंक की वेबसाइट (www.nabard.org) पर डाला जाता है.

दिशानिर्देशों/ परिचालनात्मक अनुदेशों में समय-समय पर परिपत्र जारी कर आशोधन किया जाता है और इन परिपत्रों को भी वेबसाइट पर अपलोड किया जाता है.  

(vi)

विभाग द्वारा या विभाग के नियंत्रणाधीन धारित दस्तावेजों के प्रवर्गों का विवरण

पुनर्वित्त जारी करने के लिए निम्नलिखित दस्तावेजीकरण किया जाता है -

 दीर्घावधि पुनर्वित्त जारी करना  

अ. सभी एजेंसियों के लिए सामान्य पुनर्वित्त करार, उधारकर्ता संस्थाओं द्वारा निष्पादित बोर्ड का संकल्प और चूक की स्थिति में सम्बंधित संस्था के भारतीय रिज़र्व बैंक स्थित/ प्रधान बैंकर के पास स्थित खाते को डेबिट करने का अधिदेश.

आ. राज्य सहकारी बैंकों, जो निर्धारित मानदंडों को पूरा नहीं करते, और राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों के मामले में राज्य सरकार की गारंटी.  

इ. सरकार की गारंटी (जहाँ भी आवश्यक हो) न मिलने की स्थिति में वैकल्पिक प्रतिभूतियों, जैसे सरकारी प्रतिभूतियों के बंधक या अनुसूचित बैंकों द्वारा या अच्छा काम करने वाले राज्य सहकारी बैंकों द्वारा जारी सावधि जमा रसीदों के बंधक पर विचार किया जा सकता है.

ई. एनबीएफसी/ एनबीएफसी-एमएफआई के मामले में समनुदेशन करार/ बही ऋणों, सुपुर्दगी पत्र और डीपी नोट तथा ऋणों/ प्रतिभूतियों की रसीद का दृष्टिबंधक.

दीर्घावधि पुनर्वित्त जारी करना  

अ. राज्य सहकारी बैंक/ क्षेग्रा बैंक द्वारा – ऋण करार, अधिदेश, डीपी नोट, अनतिदेय कवर विवरण  

आ. राज्य सहकारी बैंकों, जो निर्धारित मानदंडों को पूरा नहीं करते, के मामले में राज्य सरकार की गारंटी.  

इ. सरकार की गारंटी (जहाँ भी आवश्यक हो) न मिलने की स्थिति में वैकल्पिक प्रतिभूतियों, जैसे सरकारी प्रतिभूतियों के बंधक या अनुसूचित बैंकों द्वारा या अच्छा काम करने वाले राज्य सहकारी बैंकों द्वारा जारी सावधि जमा रसीदों के बंधक पर विचार किया जा सकता है.

 

(vii)

ऐसी व्यवस्थाओं के अलग-अलग विवरण जो विभाग की नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संदर्भ में जनता के सदस्यों से परामर्श या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं.

बैंकों, किसानों, ग्रामीण उद्यमियों, जनता के सदस्यों से जिला कार्यालयों, बैठकों, कार्यशालाओं, अध्ययनों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों आदि के माध्यम से प्रतिसूचना (फीडबैक) प्राप्त की जाती है और नीतियों/ कार्यक्रमों की वार्षिक समीक्षा के दौरान तथा विभाग के लिए नई वार्षिक नीतियाँ और कार्यक्रम तैयार करते समय उन्हें ध्यान में रखा जाता है.

(viii)

ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों या अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका विभाग के भागरूप में या इस विषय में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है, और इस विषय में, कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों या अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुँच होगी, विवरण

नाबार्ड के निदेशक बोर्ड या निदेशक बोर्ड की विभिन्न समितियों से अनुमोदन प्राप्त करने के बाद पुनर्वित्त विभाग की पुनर्वित्त नीति/ तौर-तरीकों को प्रभावी किया जाता है. बोर्ड/ समितियों की बैठकें/ उन बैठकों के कार्यवृत्त जनता के लिए खुले नहीं हैं.

(ix)

विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की निर्देशिका

अधिकारियों और कर्मचारियों की निर्देशिका

(x)

विभाग के प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी द्वारा प्राप्त मासिक पारिश्रमिक, जिसके अंतर्गत प्रतिकर की प्रणाली भी है जो उसके विनियमों में यथा-उपबंधित हो.

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(xi)

सभी योजनाओं, प्रस्तावित व्ययों और किए गए संवितरणों पर रिपोर्टों के अलग-अलग विवरण उपदर्शित करते हुए विभाग के प्रत्येक अभिकरण (एजेंसी) को आबंटित बजट

आबंटित बजट और किए गए संवितरण:

दीर्घावधि पुनर्वित्त –31.03.2023 की स्थिति के अनुसार

रु. करोड़ में

एजेंसी

2022-23 के लिए लक्ष्य

31.03.2023 की स्थिति के अनुसार उपलब्धि

लघु वित्त बैंक सहित वाणिज्यिक बैंक

75000.00

74928.76

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक

18000.00

11825.56

राज्य सहकारी बैंक

12500.00

12955.13

राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक

3000.00

2284.77

एनबीएफसी (एनबीएफसी-एमएफआई सहित)

11870.00

2080.00

नाबार्ड की सहायक संस्थाएँ (नैबकिसान/ नैबफिन्स/ नैबसमृद्धि)

3130.00

2940.52

राज्य सरकारों को ऋण

0

कुल

123500

107014.74

अल्पावधि पुनर्वित्त –31.03.2023 की स्थिति के अनुसार

रु. करोड़ में

एजेंसी

2022-23 के लिए लक्ष्य

31.03.2023 की स्थिति के अनुसार उपलब्धि

अल्पावधि – मौसमी कृषि परिचालन

राज्य सहकारी बैंक

45000.00

49405.36

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक

14818.84

कुल

45000.00

64224.20

अतिरिक्त अल्पावधि (मौकृप)

60000.00

65564.60

अल्पावधि (अन्य) और बुनकर

20000.00

29076.55

लघु वित्त बैंक

0.00

40.00

एसएलएफ -3

25000.00

0.00

कुल

150000.00

158905.35

सरकार-प्रायोजित योजनाएँ

रु. करोड़ में

क्र.सं.

योजना का नाम

31.03.2023 की स्थिति के अनुसार संचयी संवितरण

1

आईएसएएम की नई कृषि विपणन आधारभूत संरचना उप-योजना

469.05

2

कृषि-क्लीनिक और कृषि-व्यवसाय केंद्र (एसीएबीसी)

135.47

3

डेयरी उद्यमिता विकास योजना (डीईडीएस)

1892.29

4

पोल्ट्री उद्यम पूँजी निधि (सब्सिडी) योजना (पीवीसीएफ)

494.38

5

लघु रोमंथकों और खरगोशों का समन्वित विकास (आईडीएसआरआर)

349.30

6

शूकर विकास (पीडी)

125.10

7

भैंसों के नर बछड़ों का उद्धार और पालन-पोषण (एसएमबीसी)

2.42

8

पशुखाद्य और चारे के लिए भण्डारण सुविधा का निर्माण (सीएसएफएफ)

0.99

9

प्रभावी पशु अपशिष्ट प्रबंधक (ईएडब्ल्यूएम)

0.60

10

राष्ट्रीय जैविक खेती परियोजना (एनपीओएफ)

28.84

(xii)

सहायिकी (सब्सिडी) कार्यक्रमों के निष्पादन की रीति जिसमें आबंटित राशि और कार्यक्रमों के लाभार्थियों के ब्यौरे सम्मिलित हैं.

नाबार्ड के माध्यम से चलाई जाने वाली चालू पूँजी सब्सिडी योजनाओं की सूची मद सं. 9 के बिंदु सं. (iv) पर दी गई हैं.

1. कृषि-क्लीनिक और कृषि-व्यवसाय केंद्र (एसीएबीसी) -

उद्देश्य – किसानों को उनके दरवाजे पर मूल्य-वर्धित विस्तार सेवाएँ, परामर्श सेवाएँ अदि देने में सक्षम कृषि-उद्यम स्थापित करने के लिए अर्हता-प्राप्त कृषि-व्यावसायिकों को सुविधा प्रदान कर सरकारी विस्तार सेवाओं के प्रयासों की अनुपूर्ति करना.

सब्सिडी की उपलब्धता – योजना के अंतर्गत महिलाओं, अनुसूचित जाति/ जनजाति के सदस्यों, और पूर्वोत्तर तथा पर्वतीय क्षेत्रों के सभी श्रेणी के लाभार्थियों को परियोजना लागत के 44% की सम्मिश्र सब्सिडी, और अन्य सभी लाभार्थियों को परियोजना लागत के 36% की सब्सिडी दी जाती है.

कार्यविधि – नाबार्ड के क्षेत्रीय कार्यालय बैंको से प्राप्त सब्सिडी के दावों के प्रस्तावों की संवीक्षा करते हैं और सब्सिडी को मंजूरी देते हैं. क्षेत्रीय कार्यालय सब्सिडी के समेकित दावे पुनर्वित्त विभाग, प्रधान कार्यालय को प्रेषित करते हैं जो दावों के आधार पर भारत सरकार को निधियों की माँग प्रेषित करता है. भारत सरकार से निधियों की उपलब्धता के आधार पर क्षेत्रीय कार्यालयों से प्राप्त दावों की पुष्टि सम्बंधित बैंकों को जारी करने के लिए की जाती है.

2. कृषि विपणन आधारभूत संरचना योजना (एएमआई) -

उद्देश्य – कृषि और अनुषंगी क्षेत्र की अतिरिक्त बिक्री-योग्य उपज के विपणन के प्रभावी प्रबंधन के लिए विपणन आधारभूत संरचना विकसित करना, फसलोपरांत प्रबंधन के लिए नवोन्मेषी और अधुनातन प्रौद्योगिकी का संवर्धन करना, खेती की उपज, प्रसंस्कृत उपज और कृषि निविष्टियों के लिए वैज्ञानिक भण्डारण क्षमता के सृजन को बढ़ावा देना.

सब्सिडी की उपलब्धता –

भण्डारण आधारभूत संरचना परियोजनाओं के लिए: सब्सिडी के प्रयोजन से वित्तीय संस्था द्वारा यथा-आकलित परियोजना लागत के हिसाब से परियोजना की पूँजी लागत या किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा यथा-प्रमाणित पात्र घटकों की वास्तविक लागत की परिगणना कर, इनमें से जो भी कम हो, प्रति मीट्रिक टन सब्सिडी सीमा और साथ ही नीचे दी गई समग्र सीमा के अधीन:

श्रेणी सब्सिडी की दर (पूँजी लागत पर) सब्सिडी की सीमा
50-1000 मी.ट. (रु./मी.ट.) 1000 मी.ट. से अधिक 10,000 मी.ट. तक (रु./मी.ट.) अधिकतम सीमा (रु. लाख)
अ) पूर्वोत्तर के राज्य, सिक्किम, संघराज्य क्षेत्र अंडमान और निकोबार तथा लक्षद्वीप, पर्वतीय* क्षेत्र 33.33% 1333.20 1333.20 133.20
आ) अन्य क्षेत्र
1. पंजीकृत एफपीओ, पंचायतें, महिलाएँ, अनुसूचित जाति/ जनजाति के उद्यमी या उनकी सहकारी संस्थाएँ**/ स्वयं सहायता समूह 33.33% 1166.55 1000.00 100.00
2. अन्य सभी श्रेणियों के लाभार्थी 25% 875/- 750/- 75.00

* पर्वतीय क्षेत्र में वे स्थान आते हैं जो औसत समुद्र तल से 1,000 मीटर से अधिक ऊँचाई पर स्थित हैं.

** अनुसूचित जाति/ जनजाति की सहकारी संस्थाओं को राज्य सरकार के सम्बंधित अधिकारी द्वारा प्रमाणित होना चाहिए.

भंडार से इतर परियोजनाओं के लिए: सब्सिडी के प्रयोजन से वित्तीय संस्था द्वारा यथा-आकलित परियोजना लागत के हिसाब से परियोजना की पूँजी लागत या किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा यथा-प्रमाणित पात्र घटकों की वास्तविक लागत की परिगणना कर, इनमें से जो भी कम हो.

श्रेणी

सब्सिडी की दर (पूँजी लागत पर)

सब्सिडी की उच्चतम सीमा# (रु. लाख में)

अ) पूर्वोत्तर के राज्य, सिक्किम, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, संघराज्य क्षेत्र अंडमान और निकोबार तथा लक्षद्वीप, पर्वतीय* क्षेत्र और आदिवासी क्षेत्र

33.33%

30.00 Lakhs

आ) अन्य क्षेत्र
1. पंजीकृत एफपीओ, पंचायती राज संस्थाएँ, महिला कृषक/ उद्यमी, अनुसूचित जाति/ जनजाति के उद्यमी या उनकी सहकारी संस्थाएँ** 33.33% 30.00 लाख
2. अन्य सभी श्रेणियों के लाभार्थी 25% 25.00 लाख

* पर्वतीय क्षेत्र में वे स्थान आते हैं जो औसत समुद्र तल से 1,000 मीटर से अधिक ऊँचाई पर स्थित हैं.

** अनुसूचित जाति/ जनजाति की सहकारी संस्थाओं को राज्य सरकार के सम्बंधित अधिकारी द्वारा प्रमाणित होना चाहिए.

# दाल की दलाई और तेल की पेराई की परियोजनाओं के लिए 25% वाली श्रेणी के लिए अधिकतम सब्सिडी रु.12.50 लाख और 33.33% वाली श्रेणी के लिए अधिकतम सब्सिडी रु.16.66 लाख मात्र है.

कार्यविधि – अग्रिम सब्सिडी के लिए, बैंक सावधि ऋण की पहली क़िस्त के संवितरण से 90 दिनों के भीतर सब्सिडी के दावे ‘एनश्योर’ पोर्टल में फ़ाइल करते हैं और हार्ड प्रति में आवश्यक दस्तावेज क्षेत्रीय कार्यालयों में प्रस्तुत करते हैं जो दावों की संवीक्षा कर नाबार्ड के प्रधान कार्यालय को भेज देते हैं.

निधियों की उपलब्धता के आधार पर दावों की पुष्टि की जाती है और सब्सिडी का संवितरण किया जाता है. बैंकों, नाबार्ड तथा विपणन और निरीक्षण निदेशालय (डीएमआई), भारत सरकार के अधिकारियों की टीम द्वारा संयुक्त अनुप्रवर्तन निरीक्षण करने बाद यही कार्यविधि अंतिम सब्सिडी के लिए दोहराई जाती है.

वह भाषा जिसमें मैनुअल/ पुस्तिकाएँ उपलब्ध हैं.

(i) अल्पावधि और दीर्घावधि मैनुअल अंग्रेजी में हैं.

(ii) सरकार-प्रायोजित योजनाओं पर सभी परिपत्र और पुस्तिकाएँ द्विभाषिक हैं.

मैनुअल/ पुस्तिका को अंतिम बार कब अद्यतन किया गया? 

अल्पावधि और दीर्घावधि मैनुअलों को अंतिम बार 2017-18 में अद्यतन किया गया.

इलेक्ट्रोनिक रूप में उपलब्ध सूचना

सभी परिपत्र और संगत सूचनाएँ सॉफ्ट फॉर्म में नाबार्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं.

(xiii)

संगठन की सूचना प्राप्त करने के लिए नागरिकों को उपलब्ध सुविधाओं का विवरण

नाबार्ड में परिवाद/ शिकायत निवारण तंत्र स्थापित है. व्यक्तियों/ एजेंसियों द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत सूचना माँगी जा सकती है.

(xiv)

ऐसी अन्य सूचनाएँ जो इस धारा के अंतर्गत निर्धारित हैं.  

परिवाद निवारण पोर्टल, वेबमास्टर और ई-मेल के मध्यम से अल्पावधि और दीर्घावधि पुनर्वित्त, और सरकार-प्रायोजित चालू योजनाओं के अंतर्गत ब्याज सहायता और सब्सिडी से सम्बंधित सभी परिवादों/ शिकायतों का उत्तर दिया जाता है.  

अति महत्वपूर्ण व्यक्तियों (वीआईपी) से प्राप्त सन्दर्भों और सूचना का अधिकार के अंतर्गत माँगी जाने वाली सूचनाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं.

सूचना का अधिकार