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पर्यवेक्षण बोर्ड (रास बैंकों, जिमस बैंकों और क्षेग्रा बैंकों के लिए )
नाबार्ड अधिनियम, 1981 की धारा 13(3) के तहत बोर्ड की एक आंतरिक समिति के रूप में नाबार्ड द्वारा पर्यवेक्षण बोर्ड (रास बैंकों, जिमस बैंकों और क्षे ग्रा बैंकों के लिए) का गठन किया गया है. पर्यवेक्षण बोर्ड के मुख्य-मुख्य कार्यों  का विवरण नीचे दिया गया है.
 
  • पर्यवेक्षण और निरीक्षण, निरीक्षण निष्कर्षों की समीक्षा और उपयुक्त उपायों के सुझावों  से संबन्धित मानकों और नीतियों के बारे में दिशानिर्देश और मार्गनिर्देश जारी करना 
  • धोखाधड़ी और आंतरिक जांच और नियंत्रण से संबंधित मामलों में पर्यवेक्षण विभाग द्वारा की गई अनुवर्ती कार्रवाई की समीक्षा करना
  • सहकारी बैंकों / क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की कार्यप्रणाली जैसे वसूली, निवेश पोर्टफोलियो, ऋण अनुप्रवर्तन प्रणाली, प्रबंधन कार्य, विधियाँ, धोखाधड़ी जैसे उभरते पर्यवेक्षकीय मामलों की पहचान करना 
  • पर्यवेक्षित  बैंकों की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए आवश्यक उपाय करने के सुझाव देना
  • पर्यवेक्षण प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के उपाय सुझाना
  • भारतीय रिजर्व बैंक से पर्यवेक्षित  बैंकों के  लिए  दिशानिर्देश जारी करने तथा विनियमन संबंधी अन्य कार्रवाई करने के लिए अनुशंसा करना
  • निरीक्षण कार्य की गुणवत्ता की देखरेख करना
  • स्थलेतर  निगरानी प्रणाली और अन्य अनुपूरक माध्यमों से प्राप्त सूचनाओं पर अनुवर्ती कार्रवाई और इनकी  समीक्षा करना
  • समय-समय पर नाबार्ड के पर्यवेक्षण  बोर्ड द्वारा सौंपे  गए अन्य कार्यों को पूरा करना
नाबार्ड सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का  निरीक्षण करता है, पर्यवेक्षण बोर्ड इन निरीक्षणों से प्राप्त निष्कर्षों की समय-समय पर समीक्षा करता है. पर्यवेक्षण बोर्ड की टिप्पणियों  के आधार पर संबंधित प्राधिकारियों को बैंक की वित्तीय स्थिति की कमजोरियों से अवगत कराया जाता है ताकि इस संबंध में आवश्यक सुधारात्मक उपाय किए जाएं और इस संबंध में समुचित विनियामक कार्रवाई के लिए भारतीय रिजर्व बैंक को इसकी अनुशंसा की जाती है.